documents ⏱️ 17 मिनट पढ़ें 📅 24 सितंबर 2026

Digital Census 2027: भारत की पहली डिजिटल जनगणना और सेल्फ-एन्यूमिरेशन पोर्टल, मोबाइल ऐप से परिवार का डेटा भरने की संपूर्ण प्रक्रिया

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सुनीता शर्मा
ई-गवर्नेंस एवं नागरिक दस्तावेज़ सलाहकार

आधार प्रमाणीकरण, राशन कार्ड व्यवस्था, डिजिटल लॉकर और सार्वजनिक सेवा वितरण (Public Service Delivery) के क्षेत्र में 9 वर्षों का संपादकीय अनुभव।

⚡ त्वरित उत्तर (Quick Answer)

भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय (ORGI) ने देश की पहली 100% पेपरलेस 'डिजिटल जनगणना 2027' (Digital Census) का आधिकारिक ढांचा और 'सेल्फ-एन्यूमिरेशन' (Self-Enumeration) वेब पोर्टल तैयार कर लिया है। अब देश का प्रत्येक नागरिक सरकारी प्रगणक (Enumerator) के घर आने से पहले अपने स्मार्टफोन या कंप्यूटर से अपने परिवार, मकान, संपत्तियों और सुविधाओं का संपूर्ण डेटा खुद ऑनलाइन दर्ज कर सकता है।

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📌 मुख्य विशेषताएं व आवश्यक बिंदु

  • 1872 के बाद भारत के इतिहास में पहली बार पूरी तरह कागजरहित (Paperless) और मोबाइल आधारित डिजिटल जनगणना का आयोजन।
  • नागरिकों को 'सेल्फ-एन्यूमिरेशन' (स्वयं गणना) का विशेष विकल्प, जिससे वे बिना किसी बाहरी व्यक्ति के हस्तक्षेप के परिवार का सही विवरण दर्ज कर सकेंगे।
  • जनगणना दो चरणों में होगी: चरण 1 में मकान सूचीकरण और आवास गणना (HLO), और चरण 2 में जनसंख्या गणना (Population Enumeration)।
  • डेटा की गोपनीयता के लिए जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत पूर्ण कानूनी संरक्षण; डेटा का उपयोग किसी भी अदालत में साक्ष्य के रूप में नहीं हो सकेगा।
  • ऑनलाइन फॉर्म सबमिट करने पर एक डिजिटल कन्फर्मेशन टोकन (QR कोड) मिलेगा, जिसे भौतिक सत्यापन के लिए आने वाले प्रगणक को केवल दिखाना होगा।
चरण एवं अनुभाग पूछे जाने वाले प्रमुख प्रश्न व बिंदु नागरिक द्वारा भरे जाने वाले विकल्प प्रगणक सत्यापन का तरीका
चरण 1: मकान का विवरण (Housing Profile) भवन संख्या, दीवार, छत और फर्श की सामग्री, स्वामित्व की स्थिति (खुद का/किराए पर) पक्का/कच्चा मकान, रहने के कमरों की कुल संख्या, विवाहित जोड़ों की संख्या प्रगणक द्वारा मकान पर नंबरिंग और जीपीएस जियो-टैगिंग
चरण 1: नागरिक सुविधाएं (Amenities) पीने के पानी का मुख्य स्रोत, शौचालय का प्रकार, बिजली कनेक्शन, रसोई गैस (LPG/PNG) नल का पानी/बोरवेल, व्यक्तिगत शौचालय/सामुदायिक, उज्ज्वला कनेक्शन धारक ऑनलाइन डेटा का प्रगणक ऐप में सीधे स्वतः मिलान
चरण 1: पारिवारिक परिसंपत्तियां (Assets) रेडियो, टीवी, इंटरनेट सुविधा, लैपटॉप/कंप्यूटर, साइकिल, स्कूटर/मोटरसाइकिल, कार हाँ या नहीं में टिक मार्क (केवल सांख्यिकीय उपयोग हेतु) नागरिक के स्व-घोषणा (Self-Declaration) के आधार पर स्वीकृति
चरण 2: व्यक्तिगत जनसांख्यिकी (Demographics) परिवार के प्रत्येक सदस्य का नाम, मुखिया से संबंध, लिंग, जन्म तिथि, वैवाहिक स्थिति आधार कार्ड व जन्म प्रमाण पत्र के अनुसार सटीक विवरण प्रगणक के टैबलेट में बायोमेट्रिक या टोकन मिलान
चरण 2: सामाजिक, शैक्षिक व कार्य स्थिति धर्म, जाति वर्ग (SC/ST/अन्य), मातृभाषा, अन्य ज्ञात भाषाएं, उच्चतम शिक्षा, व्यवसाय/कार्य साक्षर/निरक्षर, डिग्री का नाम, मुख्य श्रमिक/सीमांत श्रमिक/गैर-श्रमिक डिजिटल एनक्रिप्टेड क्लाउड में स्वतः वर्गीकरण

1. डिजिटल जनगणना 2027: भारत के 150 वर्षों के इतिहास में सबसे बड़ा तकनीकी बदलाव

भारत में नियमित रूप से प्रत्येक 10 वर्ष में जनगणना कराने की परंपरा वर्ष 1881 से निरंतर चली आ रही है (पहली गैर-समकालिक जनगणना 1872 में हुई थी)। आज़ादी के बाद से 2011 तक कुल 15 जनगणनाएं संपन्न हुईं, और ये सभी भारी-भरकम कागजी फॉर्मों, करोड़ों कागजों की छपाई और लाखों प्रगणकों द्वारा घर-घर जाकर हाथ से पेन से फॉर्म भरने के पारंपरिक तरीके पर निर्भर थीं।

वर्ष 2021 की प्रस्तावित 16वीं जनगणना को कोविड-19 महामारी और वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल के कारण स्थगित करना पड़ा था। इस अंतराल का सदुपयोग करते हुए भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय (Office of the Registrar General & Census Commissioner, India - ORGI) ने जनगणना प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल और आधुनिक बनाने का ऐतिहासिक फैसला किया है। अब 'डिजिटल जनगणना 2027' भारत के इतिहास की पहली ऐसी जनगणना होगी जो 100% कागज-रहित होगी और इसमें सूचना प्रौद्योगिकी की अत्याधुनिक प्रणालियों का उपयोग किया जाएगा।

इस डिजिटल परिवर्तन के लिए सेंसस मैनेजमेंट एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (CMMS) नामक राष्ट्रीय क्लाउड पोर्टल तैयार किया गया है। इसके साथ ही देश के इतिहास में पहली बार नागरिकों को 'सेल्फ-एन्यूमिरेशन' (Self-Enumeration) यानी खुद अपने मोबाइल या लैपटॉप से अपने परिवार की जानकारी भरने की अभूतपूर्व सुविधा दी जा रही है।

2. जनगणना के दो चरण: मकान सूचीकरण (HLO) और जनसंख्या गणना (PE)

भारत की विशाल जनसंख्या और विविधता को देखते हुए जनगणना का कार्य हमेशा की तरह दो अलग-अलग चरणों में संपन्न होगा, लेकिन दोनों ही चरण पूरी तरह डिजिटल होंगे:

चरण 1: मकान सूचीकरण एवं आवास गणना (Houselisting & Housing Census - HLO)

यह पहला चरण होता है जिसमें देश के प्रत्येक भवन, मकान, झोपड़ी और व्यावसायिक प्रतिष्ठान की भौतिक पहचान और नंबरिंग की जाती है। इसमें प्रगणक प्रत्येक घर के अक्षांश-देशांतर (GPS Coordinates) दर्ज करते हैं और परिवार के जीवन स्तर, घर की बनावट (कच्चा/पक्का), पेयजल, शौचालय, बिजली, रसोई ईंधन और घरेलू संपत्तियों का विवरण दर्ज करते हैं। इसी चरण के साथ राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) का अद्यतनीकरण भी किया जाता है।

चरण 2: जनसंख्या गणना (Population Enumeration - PE)

दूसरे चरण में प्रत्येक व्यक्ति की व्यक्तिगत, सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक जानकारी दर्ज की जाती है। इसमें परिवार के प्रत्येक सदस्य की उम्र, जन्म तिथि, वैवाहिक स्थिति, धर्म, अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग, मातृभाषा, बोली जाने वाली अन्य भाषाएं, साक्षरता का स्तर, विद्यालय/कॉलेज जाने की स्थिति, कार्य या व्यवसाय (Main Worker / Marginal Worker / Non-worker), और आंतरिक प्रवास (Migration) के कारणों का गहन डेटा एकत्र किया जाता है।

3. सेल्फ-एन्यूमिरेशन पोर्टल: घर बैठे मोबाइल से फॉर्म भरने की पूरी प्रक्रिया

यदि आप नहीं चाहते कि कोई प्रगणक आपके घर के ड्राइंग रूम में बैठकर आपसे एक-एक करके 30 सवाल पूछे, या यदि आपके परिवार के सदस्य दिन में काम पर रहते हैं, तो आप सरकार के आधिकारिक सेल्फ-एन्यूमिरेशन पोर्टल (censusindia.gov.in) पर जाकर खुद फॉर्म भर सकते हैं:

चरणबद्ध ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया

  1. पंजीकरण (User Registration): आधिकारिक पोर्टल पर जाएं और 'Citizen Login / Self-Enumeration' विकल्प चुनें। अपना 10 अंकों का सक्रिय मोबाइल नंबर दर्ज करें और प्राप्त 6-अंकों के ओटीपी से अपना अकाउंट बनाएं।
  2. परिवार के मुखिया की पहचान: परिवार के उस सदस्य का नाम और आधार/पहचान विवरण चुनें जिसे परिवार का मुखिया (Head of Household) माना जाता है।
  3. मकान सूचीकरण प्रश्नावली भरना: स्क्रीन पर खुलने वाले डिजिटल फॉर्म में अपने मकान की स्थिति, कमरों की संख्या, छत-दीवार की सामग्री, पेयजल का स्रोत, टॉयलेट की व्यवस्था और बिजली कनेक्शन का चयन करें।
  4. पारिवारिक संपत्तियां चुनना: आपके घर में उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक और परिवहन साधनों (टीवी, फ्रिज, इंटरनेट, दोपहिया, चारपहिया) पर सही का निशान लगाएं।
  5. पारिवारिक सदस्यों का विवरण जोड़ना: 'Add Member' पर क्लिक करके परिवार के प्रत्येक सदस्य—चाहे वह नवजात शिशु हो या बुजुर्ग—का पूरा नाम, जन्म तिथि, शिक्षा और कार्य का विवरण भरें।
  6. डेटा प्रीव्यू और फाइनल सबमिशन: भरे गए सभी विवरणों की एक बार भली-भांति जांच कर लें। इसके बाद 'Final Submit' पर क्लिक करें। सबमिट होते ही सिस्टम द्वारा एक विशिष्ट नेशनल सेंसस कन्फर्मेशन टोकन (SE Reference Number / QR Code) जनरेट होगा, जिसे आप PDF में डाउनलोड कर सकते हैं और आपके मोबाइल पर एसएमएस द्वारा भी भेजा जाएगा।

4. फॉर्म में क्या-क्या पूछा जाएगा? 31 प्रश्नों की संपूर्ण सूची

नागरिकों की सुविधा और पारदर्शिता के लिए गृह मंत्रालय ने मकान सूचीकरण और आवास गणना के लिए 31 मानकीकृत प्रश्नों की सूची अधिसूचित की है। इनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित विवरण पूछे जाते हैं:

  • भवन संख्या (म्यूनिसिपल या स्थानीय प्राधिकरण द्वारा दी गई)।
  • जनगणना मकान संख्या और मकान का उपयोग (आवासीय, गैर-आवासीय, दुकान, गोदाम आदि)।
  • मकान की छत, बाहरी दीवार और फर्श में मुख्य रूप से प्रयुक्त सामग्री (कंक्रीट, ईंट, पत्थर, लकड़ी, घास-फूस)।
  • मकान की कुल रहने योग्य कमरों की संख्या और क्या परिवार के पास यह मकान अपने स्वामित्व का है या किराए पर है।
  • परिवार में रहने वाले कुल व्यक्तियों की संख्या और उसमें विवाहित जोड़ों की संख्या।
  • पीने के पानी का मुख्य स्रोत (घर के अंदर नल, सार्वजनिक नल, हैंडपंप, ट्यूबवेल, कुआं, नदी/झरना)।
  • प्रकाश/बिजली का मुख्य स्रोत (बिजली ग्रिड, सौर ऊर्जा, केरोसिन, अन्य)।
  • शौचालय की उपलब्धता (घर के भीतर फ्लश टॉयलेट, गड्ढा शौचालय, सामुदायिक शौचालय, या खुले में)।
  • गंदे पानी की निकासी की व्यवस्था (बंद भूमिगत नाली, खुली नाली, या नाली विहीन)।
  • रसोई घर की उपलब्धता और भोजन पकाने के लिए मुख्य ईंधन (एलपीजी/पीएनजी गैस, बिजली इंडक्शन, बायोगैस, मिट्टी का तेल, लकड़ी, गोबर के उपले)।
  • संचार एवं परिवहन संपत्तियां (रेडियो/ट्रांजिस्टर, टेलीविजन, इंटरनेट कनेक्शन, पर्सनल कंप्यूटर/लैपटॉप, साइकिल, स्कूटर/मोटरसाइकिल/मोपेड, कार/जीप/वैन)।
  • परिवार द्वारा उपभोग किया जाने वाला मुख्य अनाज (गेहूं, चावल, ज्वार, बाजरा, मक्का)।

5. डेटा गोपनीयता और सुरक्षा: जनगणना अधिनियम 1948 के कड़े प्रावधान

डिजिटल युग में नागरिकों के मन में सबसे बड़ी शंका यह होती है कि उनके व्यक्तिगत डेटा का दुरुपयोग तो नहीं होगा? क्या यह डेटा टैक्स विभाग, पुलिस या किसी निजी मार्केटिंग कंपनी के साथ साझा किया जाएगा?

इस विषय पर भारत का कानून अत्यंत कठोर और स्पष्ट है। भारतीय जनगणना अधिनियम, 1948 (Census Act, 1948) की धारा 15 के अनुसार:

  • कानूनी गोपनीयता (Statutory Confidentiality): जनगणना में एकत्र की गई किसी भी व्यक्ति या परिवार की व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह गोपनीय होती है। इसे किसी भी अन्य कानून (चाहे वह आयकर हो, जीएसटी हो, पुलिस जांच हो या न्यायालय की कार्यवाही हो) के तहत किसी भी अदालत में साक्ष्य (Evidence) के रूप में पेश नहीं किया जा सकता।
  • अधिकारियों पर दंड का प्रावधान: यदि कोई जनगणना प्रगणक या अधिकारी किसी नागरिक के व्यक्तिगत आंकड़ों को किसी अनधिकृत व्यक्ति को लीक करता है, तो अधिनियम की धारा 13 के तहत उसे 3 वर्ष तक के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा का प्रावधान है।
  • केवल समेकित सांख्यिकी (Aggregated Statistics): सरकार केवल वार्ड, गांव, ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर के सामूहिक आंकड़े (जैसे साक्षरता दर, लिंगानुपात, कार्यबल प्रतिशत) ही सार्वजनिक करती है। किसी व्यक्ति विशेष का नाम, मोबाइल नंबर या पारिवारिक संपत्ति का व्यक्तिगत रिकॉर्ड कभी भी सार्वजनिक डोमेन में नहीं आता।
  • क्लाउड सुरक्षा: पूरा डेटा एनआईसी (NIC) के टियर-4 राष्ट्रीय डेटा केंद्र (National Data Centre) में मिलिट्री-ग्रेड 256-बिट एनक्रिप्शन के साथ सुरक्षित रहता है।

6. डिजिटल टोकन और प्रगणक (Enumerator) का भौतिक सत्यापन कैसे होगा?

जब आप सेल्फ-एन्यूमिरेशन पोर्टल पर फॉर्म भर देते हैं, तो उसके बाद क्या होता है? यह समझना भी अत्यंत आवश्यक है:

प्रगणक का दौरा और टोकन सत्यापन

जब आपके इलाके में निर्धारित तिथियों पर अधिकृत सरकारी प्रगणक (जो सामान्यतः स्थानीय सरकारी स्कूल के शिक्षक, पटवारी, या नगर पालिका के कर्मचारी होते हैं) घर-घर का दौरा करेंगे, तो आपको उन्हें कोई नया डेटा लिखवाने की आवश्यकता नहीं होगी। आपको केवल अपना वह कन्फर्मेशन टोकन या QR कोड दिखाना होगा जो आपको ऑनलाइन फॉर्म भरने के बाद मिला था।

प्रगणक अपने सरकारी मोबाइल ऐप (Census Enumerator App) से उस QR कोड को स्कैन करेगा। स्कैन होते ही उसके टैबलेट में यह दर्ज हो जाएगा कि इस मकान संख्या का डेटा पहले ही ऑनलाइन भरा जा चुका है। प्रगणक केवल आपके मकान की दीवार पर चॉक या स्टिकर से स्थायी जनगणना नंबर (Census House Number) लिखेगा, मकान के सामने खड़े होकर ऐप से एक बार जीपीएस टैग करेगा और आपका भौतिक सत्यापन सेकंडों में पूरा हो जाएगा।

7. दोनों चरणों की विस्तृत तुलना और पूछे जाने वाले प्रश्नों का मास्टर चार्ट

नीचे दी गई तालिका में डिजिटल जनगणना 2027 के दोनों चरणों के बीच के अंतर और कार्यप्रणाली को स्पष्ट किया गया है:

प्रमुख पहलू चरण 1: मकान सूचीकरण (HLO) चरण 2: जनसंख्या गणना (PE)
फोकस एवं लक्ष्य मकानों की गिनती, भवन निर्माण सामग्री, बुनियादी सुविधाएं और संपत्तियां प्रत्येक व्यक्ति की आयु, लिंग, शिक्षा, कार्य, धर्म, भाषा और प्रवासन
प्रश्नों की कुल संख्या 31 मानकीकृत प्रश्न (मकान और परिवार स्तर पर) लगभग 28 से 30 प्रश्न (प्रति व्यक्ति व्यक्तिगत स्तर पर)
सेल्फ-एन्यूमिरेशन की सुविधा हाँ, पोर्टल और मोबाइल ऐप पर पूर्ण सुविधा उपलब्ध हाँ, दोनों चरणों के लिए नागरिक स्वयं फॉर्म भर सकते हैं
नीतिगत महत्व आवास योजनाओं (PMAY), स्वच्छ भारत, हर घर जल और उज्ज्वला के लिए डेटा संसदीय परिसीमन (Delimitation), आरक्षण, शिक्षा और स्वास्थ्य बजट आवंटन
दस्तावेज दिखाने की जरूरत कोई भौतिक दस्तावेज या फोटोकॉपी जमा नहीं करनी होती कोई दस्तावेज जमा नहीं करना होता; पूर्णतः स्व-घोषणा (Self-Declaration) पर आधारित

8. महापंजीयक कार्यालय (ORGI) संपर्क सूत्र, हेल्पलाइन और सहायता

डिजिटल जनगणना 2027 के संबंध में किसी भी प्रकार की जानकारी, सहायता या तकनीकी समस्या के समाधान के लिए निम्नलिखित आधिकारिक माध्यम उपलब्ध हैं:

  • आधिकारिक राष्ट्रीय जनगणना पोर्टल: censusindia.gov.in
  • राष्ट्रीय जनगणना टोल-फ्री हेल्पलाइन: 1800-180-1111 (सुबह 8:00 बजे से रात 8:00 बजे तक सभी भाषाओं में)
  • तकनीकी सहायता ई-मेल: helpdesk.census@gov.in (पोर्टल लॉगिन और पासवर्ड समस्याओं हेतु)
  • मुख्यालय: भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त का कार्यालय, एनडीसीसी-II भवन, जय सिंह रोड, नई दिल्ली - 110001।

9. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

प्र. 1: क्या डिजिटल जनगणना में परिवार का डेटा भरने के लिए आधार कार्ड या कोई दस्तावेज दिखाना अनिवार्य है?

उत्तर: नहीं, बिल्कुल नहीं। भारत की जनगणना पूरी तरह नागरिक के 'स्व-घोषणा' (Self-Declaration) के सिद्धांत पर आधारित होती है। प्रगणक को कोई भी मूल दस्तावेज (जैसे जन्म प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, या संपत्ति की रजिस्ट्री) दिखाने या उनकी फोटोकॉपी जमा करने की कोई आवश्यकता नहीं होती। आधार नंबर देना भी पूरी तरह स्वैच्छिक (Voluntary) है, अनिवार्य नहीं।

प्र. 2: यदि मैं ऑनलाइन सेल्फ-एन्यूमिरेशन पोर्टल पर फॉर्म न भर पाऊं, तो क्या होगा?

उत्तर: यदि आप किसी कारणवश खुद ऑनलाइन फॉर्म नहीं भर पाते हैं, तो चिंता की कोई बात नहीं है। निर्धारित तिथियों पर सरकारी प्रगणक (Enumerator) स्वयं आपके घर आएंगे और अपने आधिकारिक मोबाइल ऐप/टैबलेट में आपसे मौखिक रूप से सवाल पूछकर सभी विवरण दर्ज करेंगे। सेल्फ-एन्यूमिरेशन केवल एक अतिरिक्त नागरिक सुविधा है, कोई बाध्यता नहीं।

प्र. 3: क्या किराएदार का विवरण मकान मालिक भरेगा या किराएदार खुद भरेगा?

उत्तर: जनगणना का नियम है कि 'जो जहाँ सामान्य रूप से रहता है, उसकी गणना वहीं होगी'। यदि कोई परिवार किराए के मकान में रहता है, तो वह एक स्वतंत्र 'जनगणना परिवार' (Census Household) माना जाता है। किराएदार परिवार का मुखिया अपने परिवार का डेटा खुद भरेगा और मकान के स्वामित्व की स्थिति में 'Rented / किराए पर' चुनेगा। मकान मालिक केवल अपने स्वयं के रहने वाले हिस्से का डेटा भरेगा।

प्र. 4: क्या जनगणना में गलत जानकारी दर्ज करने पर कोई कानूनी सजा हो सकती है?

उत्तर: हाँ, जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 10 और 11 के तहत देश के प्रत्येक नागरिक का यह कानूनी कर्तव्य है कि वह प्रगणक द्वारा पूछे गए प्रश्नों का सत्य और सही उत्तर दे। जानबूझकर गलत जानकारी देना, गणना में भाग लेने से इनकार करना, या प्रगणक के कार्य में बाधा डालना कानूनन दंडनीय अपराध है, जिसके लिए जुर्माना लगाया जा सकता है।

प्र. 5: जनगणना में दर्ज की गई जाति या आय का उपयोग क्या मुझे किसी योजना से बाहर करने के लिए किया जा सकता है?

उत्तर: नहीं, कतई नहीं। जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 15 के तहत व्यक्तिगत जनगणना डेटा का उपयोग किसी भी दंडात्मक कार्रवाई, टैक्स असेसमेंट या किसी कल्याणकारी योजना के लाभार्थी को अपात्र घोषित करने के लिए नहीं किया जा सकता। यह डेटा केवल देश के समग्र विकास, बजट निर्माण और नीतिगत नियोजन के लिए सांख्यिकीय आधार पर उपयोग किया जाता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q. क्या डिजिटल जनगणना में परिवार का डेटा भरने के लिए आधार कार्ड दिखाना अनिवार्य है?

A. नहीं, जनगणना पूर्णतः नागरिक के स्व-घोषणा (Self-Declaration) पर आधारित होती है, कोई भी मूल दस्तावेज या फोटोकॉपी जमा करना अनिवार्य नहीं है।

Q. यदि मैं ऑनलाइन सेल्फ-एन्यूमिरेशन पोर्टल पर फॉर्म न भर पाऊं, तो क्या होगा?

A. चिंता की कोई बात नहीं, सरकारी प्रगणक (Enumerator) स्वयं आपके घर आकर आधिकारिक मोबाइल ऐप से मौखिक पूछताछ द्वारा डेटा दर्ज करेंगे।

Q. क्या किराएदार का विवरण मकान मालिक भरेगा या किराएदार खुद भरेगा?

A. किराएदार परिवार एक अलग जनगणना इकाई है; किराएदार का मुखिया अपने परिवार का डेटा खुद भरेगा और स्वामित्व में 'किराए पर' चुनेगा।

Q. क्या जनगणना में गलत जानकारी दर्ज करने पर कोई कानूनी सजा हो सकती है?

A. हाँ, जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत जानबूझकर झूठा विवरण देना या गणना में बाधा डालना कानूनन दंडनीय अपराध है।

Q. जनगणना डेटा का उपयोग क्या किसी योजना से बाहर करने के लिए हो सकता है?

A. नहीं, अधिनियम की धारा 15 के अनुसार व्यक्तिगत डेटा न्यायालय या किसी अन्य विभाग के साथ साझा नहीं होता, यह केवल सामूहिक सांख्यिकी हेतु है।

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