1. GeM पोर्टल क्या है? GFR 2017 नियम 149 और MSME 25% आरक्षण नीति
वर्ष 2016 से पहले भारत में सरकारी विभागों द्वारा सामान और सेवाएं खरीदने की प्रक्रिया बेहद जटिल, अपारदर्शी और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी रहती थी। सामान्य स्टेशनरी, कंप्यूटर, कुर्सियों या गाड़ियों को किराए पर लेने के लिए भी महीनों तक कागजी टेंडर निकाले जाते थे और इसमें स्थानीय स्तर पर चंद चहेते सप्लायरों की साठगांठ रहती थी। छोटे व्यापारी और दूरदराज के निर्माता सरकारी दफ्तरों में घुस भी नहीं पाते थे।
इस पूरी व्यवस्था को पारदर्शी और डिजिटल बनाने के लिए वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने 9 अगस्त 2016 को गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (Government e-Marketplace - GeM - gem.gov.in) की स्थापना की। यह अमेज़न या फ्लिपकार्ट की तरह ही एक एंड-टू-एंड डिजिटल ई-कॉमर्स पोर्टल है, जहाँ क्रेता (Buyer) भारत सरकार के मंत्रालय, राज्य सरकारें, सेना, रेलवे और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSUs) हैं, और विक्रेता (Seller) देश का कोई भी छोटा-बड़ा व्यापारी, निर्माता या सेवा प्रदाता हो सकता है।
कानूनी अनिवार्यता: GFR 2017 का नियम 149
केंद्र सरकार ने सामान्य वित्तीय नियम 2017 (General Financial Rules - GFR 2017) में संशोधन करके नियम 149 (Rule 149) को अनिवार्य बना दिया है। इसके अनुसार यदि कोई वस्तु या सेवा GeM पोर्टल पर उपलब्ध है, तो किसी भी सरकारी अधिकारी को बाहर खुले बाजार या ऑफलाइन टेंडर से वह सामान खरीदने का कानूनी अधिकार नहीं है। उसे अनिवार्य रूप से GeM पोर्टल के जरिए ही ऑर्डर देना होगा।
पब्लिक प्रोक्योरमेंट पॉलिसी फॉर MSEs (25% अनिवार्य कोटा)
सूक्ष्म और लघु उद्यमों (MSEs) को संबल देने के लिए केंद्र सरकार की सार्वजनिक खरीद नीति के तहत प्रत्येक केंद्रीय मंत्रालय, विभाग और सीपीएसयू के लिए अपनी कुल वार्षिक खरीद का कम से कम 25% हिस्सा अनिवार्य रूप से सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों से खरीदना कानूनी बाध्यता है। इस 25% कोटे के भीतर:
- 4% खरीद: अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (SC/ST) के स्वामित्व वाले एमएसएमई से होना अनिवार्य है।
- 3% खरीद: महिला उद्यमियों के स्वामित्व वाले एमएसएमई से होना अनिवार्य है।
यह व्यवस्था देश के लाखों छोटे दुकानदारों और ग्रामीण निर्माताओं के लिए सीधे सरकार का सप्लायर बनने का ऐतिहासिक अवसर है।
2. सरकारी खरीद के चार प्रमुख तरीके: डायरेक्ट परचेज से लेकर ई-बिडिंग तक
GeM पोर्टल पर सरकारी खरीदार अपनी मनमर्जी से सामान नहीं खरीद सकते। वित्त मंत्रालय ने पारदर्शिता के लिए चार स्पष्ट मूल्य स्लैब निर्धारित किए हैं:
1. डायरेक्ट परचेज (Direct Purchase - 25,000 रुपये तक)
यदि किसी सरकारी कार्यालय को 25,000 रुपये तक के मूल्य की कोई भी वस्तु (जैसे प्रिंटर पेपर, पेन, स्टेपलर, सफाई सामग्री) खरीदनी है, तो अधिकारी को कोई टेंडर निकालने या तीन कोटेशन लेने की जरूरत नहीं होती। वह पोर्टल पर जाकर अपनी जरूरत के विनिर्देश (Specifications) और गुणवत्ता वाले किसी भी रजिस्टर्ड सेलर का उत्पाद चुनकर सीधे 'Buy Now' बटन दबाकर ऑर्डर दे सकता है।
2. एल-1 तुलना (L1 Purchase - 25,000 से 5,00,000 रुपये तक)
25 हजार से 5 लाख रुपये के बीच की खरीद के लिए खरीदार को पोर्टल पर उपलब्ध कम से कम 3 अलग-अलग मूल निर्माताओं (OEMs) के उत्पादों की तकनीकी तुलना करनी होती है। जो उत्पाद तकनीकी रूप से समान गुणवत्ता का हो और कीमत में सबसे कम (L-1 यानी Lowest Price) हो, सिस्टम अनिवार्य रूप से उसी विक्रेता को ऑर्डर जारी करता है।
3. इलेक्ट्रॉनिक बिडिंग और रिवर्स ऑक्शन (Bidding / RA - 5 लाख से अधिक)
5 लाख रुपये से अधिक के सभी सरकारी ऑर्डरों के लिए GeM पोर्टल पर ओपन ई-टेंडर (Bidding) निकालना 100% अनिवार्य है। यह टेंडर पोर्टल पर देश भर के सभी पात्र विक्रेताओं को दिखाई देता है। विक्रेता ऑनलाइन अपनी तकनीकी बिड और मूल्य बिड (Price Bid) जमा करते हैं। इसके बाद इलेक्ट्रॉनिक रिवर्स ऑक्शन (Reverse Auction) होता है, जिसमें स्क्रीन पर एक निर्धारित समय तक लाइव बोलियां घटती हैं और न्यूनतम बोलीदाता को स्वतः अनुबंध मिल जाता है।
3. सेलर रजिस्ट्रेशन के लिए पूर्व-आवश्यकताएं: पैन, उद्यम, जीएसटी और डीएससी
GeM पोर्टल पर एक विक्रेता (Seller/Service Provider) के रूप में अपना खाता खोलने से पहले आपके पास निम्नलिखित दस्तावेज पूरी तरह तैयार होने चाहिए:
- पैन कार्ड (PAN Card): प्रोप्राइटरशिप फर्म के लिए मालिक का व्यक्तिगत पैन, जबकि पार्टनरशिप फर्म, एलएलपी या प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के लिए संस्था का पैन कार्ड।
- उद्यम रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र (Udyam Registration): सूक्ष्म, लघु या मध्यम उद्योग के रूप में पंजीकृत होने का डिजिटल प्रमाण पत्र। यह एमएसएमई मंत्रालय के पोर्टल पर बिल्कुल मुफ्त बनता है।
- जीएसटी पहचान संख्या (GSTIN): यदि आपकी वस्तु या सेवा जीएसटी के दायरे में आती है, तो सक्रिय जीएसटी नंबर अनिवार्य है। (असम, पूर्वोत्तर और कुछ विशेष छूट प्राप्त श्रेणियों को छोड़कर)।
- बैंक खाता और आईएफएससी कोड: फर्म के नाम पर सक्रिय चालू खाता (Current Account) या प्रोप्राइटर का बचत खाता।
- आधार से लिंक मोबाइल नंबर: अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता (Authorized Signatory) का आधार, जिस पर ई-हस्ताक्षर (e-Sign OTP) आएगा।
- डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC Class 3): प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों और एलएलपी के लिए क्लास-3 डिजिटल सिग्नेचर डोंगल अनिवार्य है, जबकि एकल स्वामित्व (Proprietorship) फर्म केवल आधार ओटीपी से भी काम कर सकती हैं।
- पिछले 3 वर्षों का आईटीआर (ITR): वित्तीय टर्नओवर के सत्यापन के लिए पिछले वित्तीय वर्षों का आयकर रिटर्न और ऑडिटेड बैलेंस शीट।
4. सेलर रजिस्ट्रेशन की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया: प्रोफाइल 100% कैसे पूरी करें?
GeM पोर्टल पर सेलर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन, पेपरलेस और निःशुल्क है। आइए इसे चरणबद्ध तरीके से समझें:
चरण 1: प्राइमरी सेलर अकाउंट बनाना
- आधिकारिक वेबसाइट gem.gov.in पर जाएं और ऊपर दाईं ओर 'Sign Up ➡️ Seller' पर क्लिक करें।
- नियम और शर्तों (Terms & Conditions) को पढ़कर सहमति दें।
- अपने व्यवसाय का प्रकार चुनें—Proprietorship, Firm, Company, Trust/Society, या Central/State PSU।
- अपनी व्यावसायिक संस्था का आधिकारिक नाम दर्ज करें और अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता का आधार नंबर या पैन नंबर डालें। आधार से लिंक मोबाइल पर आए OTP को डालकर सत्यापन करें।
- अपना आधिकारिक ईमेल पता दर्ज करें और ईमेल पर आए सत्यापन लिंक पर क्लिक करके पासवर्ड सेट करें। आपका GeM सेलर यूजर आईडी जनरेट हो जाएगा।
चरण 2: सेलर प्रोफाइल को 100% पूरा करना
केवल अकाउंट बनाने से आप टेंडर में भाग नहीं ले सकते। आपको लॉगिन करके अपनी प्रोफाइल को शत-प्रतिशत पूरा करना होता है:
- पैन सत्यापन: सीबीडीटी (CBDT) डेटाबेस से आपका पैन तुरंत ऑनलाइन वैलिडेट होता है।
- उद्यम सत्यापन: अपना 19 अंकों का उद्यम नंबर (UDYAM-XX-00-0000000) डालें। सिस्टम एमएसएमई मंत्रालय के सर्वर से आपकी इकाई की श्रेणी (Micro / Small / Medium) अपने आप खींच लेता है।
- जीएसटी सत्यापन: अपना जीएसटी नंबर दर्ज करें। जीएसटीएन (GSTN) पोर्टल से आपका व्यापारिक पता और टैक्स अनुपालन रिकॉर्ड फेच हो जाता है।
- बैंक खाता सत्यापन (Penny Drop): अपना खाता नंबर और आईएफएससी कोड डालें। GeM सिस्टम आपके खाते में 1 रुपये ट्रांसफर करके बैंक खाते के नाम का पैन से स्वतः मिलान (Penny Drop Verification) करता है।
- कार्यालय का पता: अपने पंजीकृत कार्यालय और गोदाम (Warehouse/Factory) का पूरा पता पिनकोड सहित दर्ज करें।
5. कौशन मनी (Caution Money) स्लैब और बैंक खाता सत्यापन
GeM पोर्टल पर फर्जी विक्रेताओं और टेंडर जीतकर मुकर जाने वाले गैर-गंभीर लोगों को रोकने के लिए सरकार ने 'कौशन मनी' (Caution Money Deposit) का नियम लागू किया है। यह कोई सरकारी फीस या खर्च नहीं है, बल्कि यह आपकी सुरक्षा अमानत (Refundable Security Deposit) है जो आपके GeM सेलर लेजर में हमेशा सुरक्षित रहती है और व्यवसाय बंद करने पर वापस मिल जाती है:
| विक्रेता का वार्षिक टर्नओवर (Annual Turnover) | अनिवार्य कौशन मनी जमा राशि | भुगतान का तरीका |
|---|---|---|
| 1 करोड़ रुपये से कम (सूक्ष्म एवं छोटे उद्यम) | मात्र 5,000 रुपये | नेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड या यूपीआई द्वारा ऑनलाइन |
| 1 करोड़ से 10 करोड़ रुपये के बीच | 10,000 रुपये | नेट बैंकिंग या आरटीजीएस/एनईएफटी |
| 10 करोड़ रुपये से अधिक (बड़ी कंपनियां) | 25,000 रुपये | नेट बैंकिंग या आरटीजीएस/एनईएफटी |
जब तक आप कौशन मनी जमा नहीं करते, तब तक आप पोर्टल पर अपने उत्पाद कैटलॉग लाइव नहीं कर सकते और न ही किसी सरकारी टेंडर में बोली लगा सकते हैं।
6. उत्पाद और सेवा कैटलॉग कैसे अपलोड करें? ओईएम (OEM) पेयरिंग का नियम
प्रोफाइल पूरी होने के बाद अगला कदम होता है अपने उत्पादों या सेवाओं को GeM की डिजिटल दुकान में सजाना। GeM पर विक्रेता दो प्रकार के होते हैं:
1. ओईएम (Original Equipment Manufacturer - मूल निर्माता)
यदि आप खुद किसी उत्पाद (जैसे एलईडी बल्ब, फर्नीचर, वॉटर प्यूरीफायर) का निर्माण करते हैं या आपका अपना रजिस्टर्ड ब्रांड है, तो आप 'OEM Dashboard' के लिए आवेदन करते हैं। आपको अपने ट्रेडमार्क प्रमाण पत्र (Trademark Certificate) और फैक्ट्री लाइसेंस की कॉपी अपलोड करनी होती है। ओईएम बनने के बाद आप GeM पर अपना नया ब्रांड और नए उत्पाद मॉडल जोड़ सकते हैं और अन्य रीसेलरों को अपना सामान बेचने की अनुमति दे सकते हैं।
2. रीसेलर / डीलर (Reseller Pairing)
यदि आप निर्माता नहीं हैं बल्कि किसी प्रसिद्ध कंपनी (जैसे HP, Dell, Godrej, Havells) के अधिकृत डीलर या सामान्य सप्लायर हैं, तो आपको नया उत्पाद बनाने की जरूरत नहीं होती। आप 'Pairing' (कैटलॉग पेयरिंग) विकल्प में जाते हैं, संबंधित ब्रांड और मॉडल का चयन करते हैं, अपनी बिक्री कीमत (जो एमआरपी से कम होनी चाहिए), उपलब्ध स्टॉक की मात्रा, डिलीवरी का समय और डिलीवरी लोकेशन (जैसे पूरे राज्य में या पूरे भारत में) दर्ज करते हैं। सबमिट करते ही आपका उत्पाद लाइव हो जाता है।
7. ऑर्डर मिलने के बाद क्या करें? CRAC रसीद और 10 दिनों में अनिवार्य भुगतान
जब कोई सरकारी विभाग आपको ऑर्डर देता है, तो आपको ईमेल और एसएमएस पर तुरंत सूचना मिलती है:
- ऑर्डर स्वीकार करना: GeM पोर्टल पर लॉगिन करें और 'Orders' सेक्शन में जाकर 48 घंटे के भीतर ऑर्डर को औपचारिक रूप से 'Accept' करें और अनुबंध (Contract Copy) डाउनलोड करें।
- सामान की डिलीवरी: अनुबंध में तय डिलीवरी तिथि के भीतर सामान को संबंधित सरकारी कार्यालय में पहुंचाएं। सामान के साथ GeM पोर्टल से जनरेटेड इनवॉइस (GeM Invoice) और डिलीवरी चालान साथ लगाएं।
- सीआरएसी (Consignee Receipt and Acceptance Certificate - CRAC): जब सरकारी विभाग सामान प्राप्त कर लेता है, तो संबंधित अधिकारी सामान की गुणवत्ता जांचता है और पोर्टल पर डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित 'CRAC' जारी करता है।
- 10 दिनों में 100% अनिवार्य भुगतान: GeM के नियमों के तहत CRAC जारी होने के अधिकतम 10 दिनों के भीतर सरकारी खरीदार को पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS) या ट्रेजरी के माध्यम से विक्रेता के बैंक खाते में पूरा भुगतान करना कानूनन बाध्यकारी है। यदि विभाग भुगतान में 10 दिन से ज्यादा की देरी करता है, तो सरकारी अधिकारी पर प्रति माह 1% का दंडात्मक ब्याज (Penal Interest) लगाया जाता है, जो सीधे विक्रेता को मिलता है।
8. सूक्ष्म व लघु उद्योगों (MSEs) को मिलने वाले विशेष विशेषाधिकार और छूट
GeM पोर्टल पर छोटे भारतीय उद्यमियों को बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों से सुरक्षित रखने के लिए कई असाधारण कानूनी विशेषाधिकार दिए गए हैं:
- ईएमडी (Earnest Money Deposit) से 100% छूट: सामान्य टेंडरों में लाखों रुपये की बयाना राशि (EMD) जमा करनी पड़ती है, जिससे छोटे व्यापारी बाहर हो जाते थे। GeM पर पंजीकृत किसी भी MSME/स्टार्टअप को ईएमडी से पूर्ण छूट मिलती है।
- टर्नओवर और अनुभव में छूट: कई सरकारी टेंडरों में खरीदार शर्त रख देते थे कि "सप्लायर का पिछले 3 साल का टर्नओवर 5 करोड़ होना चाहिए"। नीति आयोग और व्यय विभाग के निर्देशों के अनुसार यदि कोई एमएसएमई या स्टार्टअप तकनीकी रूप से गुणवत्तापूर्ण उत्पाद दे रहा है, तो खरीदार उस पर पूर्व अनुभव और टर्नओवर की कठोर शर्तें नहीं थोप सकता।
- एल-1 परचेज प्रेफरेंस (Purchase Preference): यदि किसी बिड में कोई बड़ी कंपनी सबसे कम कीमत (L-1) पर आती है, लेकिन कोई सूक्ष्म/लघु उद्योग (MSE) L-1 + 15% के दायरे में होता है, तो उस एमएसएमई को बड़ी कंपनी के रेट का मिलान (Price Match) करने का पहला अवसर दिया जाता है और कुल ऑर्डर का कम से कम 25% हिस्सा उस छोटे उद्योग को ही सौंपा जाता है।
9. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
प्र. 1: क्या GeM पोर्टल पर सेलर रजिस्ट्रेशन करने के लिए सरकार कोई फीस लेती है?
उत्तर: बिल्कुल नहीं। भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय द्वारा संचालित GeM पोर्टल पर सेलर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया 100% निःशुल्क (Free of Cost) है। किसी भी बिचौलिए, दलाल या एजेंसी को पैसे देने की आवश्यकता नहीं है। केवल 5,000 रुपये की कौशन मनी जमा करनी होती है जो पूरी तरह रिफंडेबल (जमानत राशि) होती है और आपके अपने अकाउंट लेजर में रहती है।
प्र. 2: क्या प्रोप्राइटरशिप (एकल स्वामित्व) फर्म बिना डिजिटल सिग्नेचर (DSC) के GeM पर काम कर सकती है?
उत्तर: हाँ, प्रोप्राइटरशिप फर्म के मालिकों के लिए आधार आधारित ई-साइन (Aadhaar e-Sign OTP) की पूरी सुविधा उपलब्ध है। उन्हें बाजार से 2,000 रुपये का यूएसबी डीएससी डोंगल खरीदने की कोई आवश्यकता नहीं है। हालांकि, यदि आपकी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी, पार्टनरशिप फर्म या ट्रस्ट है, तो क्लास-3 डीएससी का होना अनिवार्य है।
प्र. 3: सामान सप्लाई करने के बाद यदि सरकारी विभाग मेरा पेमेंट रोक ले, तो मैं क्या करूँ?
उत्तर: GeM पोर्टल पर CRAC जारी होने के 10 दिनों के भीतर भुगतान होना अनिवार्य है। यदि भुगतान नहीं होता है, तो आप GeM पोर्टल के 'Incident Management System' में सीधे उस विभाग के खिलाफ शिकायत दर्ज कर सकते हैं। शिकायत दर्ज होते ही GeM प्रशासन उस सरकारी खरीदार की पोर्टल से नई खरीदारी करने की शक्ति को ब्लॉक (Freeze) कर देता है। इसके अतिरिक्त आप एमएसएमई समाधान पोर्टल (samadhaan.msme.gov.in) पर विलंबित भुगतान का वाद दायर कर सकते हैं जिसमें बैंक दर के तीन गुना चक्रवृद्धि ब्याज का विधिक प्रावधान है।
प्र. 4: क्या महिलाएं या अनुसूचित जाति/जनजाति के उद्यमी GeM पर कोई विशेष लाभ पा सकते हैं?
उत्तर: जी हाँ, GeM पोर्टल पर महिला उद्यमियों के लिए 'वुमनिया ऑन जेम' (Womaniya on GeM) और एससी/एसटी उद्यमियों के लिए विशेष आउटरीच कार्यक्रम चलाए जाते हैं। इसके तहत उन्हें सरकारी खरीदारों के सर्च फिल्टर में प्राथमिकता मिलती है और केंद्र सरकार के 25% एमएसएमई कोटे में से 4% एससी/एसटी और 3% महिला उद्यमियों के लिए आरक्षित रहता है।
प्र. 5: क्या कोई सेलर केवल सेवाएं (Services) जैसे कैटरिंग, ट्रांसपोर्ट या आईटी सपोर्ट भी GeM पर बेच सकता है?
उत्तर: बिल्कुल। GeM केवल भौतिक सामानों (Products) के लिए नहीं है, बल्कि इस पर 300 से अधिक सेवा श्रेणियां (Service Categories) उपलब्ध हैं—जिनमें सुरक्षा गार्ड सेवाएं, सफाई एवं हाउसकीपिंग, वाहन किराया (कैब हायरिंग), क्लाउड होस्टिंग, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, कैटरिंग, और प्रिंटिंग सेवाएं शामिल हैं। आप सर्विस प्रोवाइडर के रूप में भी रजिस्ट्रेशन करके करोड़ों के सरकारी सेवा अनुबंध प्राप्त कर सकते हैं।