1. विवाह पंजीकरण क्यों अनिवार्य है और इसके क्या कानूनी लाभ हैं?
चित्र: विवाह प्रमाण पत्र (Marriage Certificate) ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन व एसडीएम कोर्ट सत्यापन।
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार भारत में सभी धर्मों के नागरिकों के लिए विवाह का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है।
मुख्य उपयोग:
- पासपोर्ट और वीज़ा: विदेश यात्रा, पीआर (PR) या पति/पत्नी के लिए स्पाउस वीज़ा (Spouse Visa) के आवेदन में विवाह प्रमाण पत्र सबसे प्राथमिक अनिवार्य दस्तावेज़ है।
- बैंक जॉइंट अकाउंट व लॉकर: पति-पत्नी का संयुक्त बैंक खाता खोलने और एक-दूसरे को वित्तीय नॉमिनी बनाने हेतु।
- संपत्ति एवं उत्तराधिकार: पति या पत्नी की मृत्यु की स्थिति में पैतृक संपत्ति, बैंक बैलेंस और बीमा राशि पर कानूनी अधिकार साबित करने के लिए।
- पारिवारिक पेंशन व ग्रेच्युटी: सरकारी या निजी क्षेत्र में पति/पत्नी को पेंशन का हकदार बनाने के लिए।
- कानूनी सुरक्षा: घरेलू हिंसा, परित्याग या भरण-पोषण (Alimony) के दावों में वैवाहिक स्थिति का अकाट्य साक्ष्य।
2. हिन्दू विवाह अधिनियम (1955) बनाम विशेष विवाह अधिनियम (1954)
- हिन्दू विवाह अधिनियम (Hindu Marriage Act 1955): यदि विवाह रीति-रिवाजों (सप्तपदी/सात फेरे) के साथ पहले ही संपन्न हो चुका है और दोनों पक्ष हिंदू, सिख, जैन या बौद्ध हैं, तो इसके तहत पंजीकरण होता है। इसमें सत्यापन तुरंत या 1-3 दिनों में पूरा हो जाता है।
- विशेष विवाह अधिनियम (Special Marriage Act 1954): यदि अलग-अलग धर्म या समुदाय के दो लोग बिना किसी धार्मिक रीति-रिवाज के सिविल मैरिज (कोर्ट मैरिज) करना चाहते हैं, तो इस एक्ट के तहत आवेदन होता है। इसमें सब-रजिस्ट्रार द्वारा 30 दिनों का सार्वजनिक नोटिस जारी किया जाता है और उसके बाद विवाह संपन्न कराकर प्रमाण पत्र दिया जाता है।
3. विवाह पंजीकरण हेतु पात्रता और आयु की शर्तें
- विवाह के समय वर (Groom) की आयु न्यूनतम 21 वर्ष और वधू (Bride) की आयु न्यूनतम 18 वर्ष होनी चाहिए।
- दोनों पक्ष मानसिक रूप से स्वस्थ और कानूनी सहमति देने में सक्षम हों।
- विवाह के समय दोनों में से किसी का भी पहले से कोई जीवित जीवनसाथी (Spouse) न हो (विधवा/तलाकशुदा होने पर मृत्यु या तलाक की डिक्री का प्रमाण आवश्यक है)।
4. जरूरी दस्तावेज़ों की चेकलिस्ट
| दस्तावेज़ | प्रकार | विवरण | अनिवार्यता |
|---|---|---|---|
| वर एवं वधू का आधार कार्ड | पहचान व पता | दोनों का बायोमेट्रिक पहचान साक्ष्य | अनिवार्य |
| आयु प्रमाण पत्र | जन्म साक्ष्य | 10वीं की मार्कशीट या जन्म प्रमाण पत्र | अनिवार्य |
| शादी का कार्ड (Marriage Card) | विवाह साक्ष्य | शादी का मूल निमंत्रण पत्र | अनिवार्य |
| विवाह की संयुक्त तस्वीरें | फोटोग्राफ | जयमाला या सात फेरे की 2-3 रंगीन तस्वीरें | अनिवार्य |
| वर-वधू की अलग-अलग पासपोर्ट फोटो | फोटोग्राफ | प्रत्येक की 4 पासपोर्ट साइज रंगीन फोटो | अनिवार्य |
| गवाहों के दस्तावेज़ | गवाह साक्ष्य | 2 या 3 गवाहों के आधार कार्ड व पैन कार्ड | अनिवार्य |
| शपथ पत्र (Affidavit) | घोषणा पत्र | वर-वधू द्वारा नोटरीकृत वैवाहिक घोषणा | अनिवार्य |
5. ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और स्लॉट बुकिंग की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया
- राज्य के स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन (IGRS) पोर्टल पर जाएं: (जैसे उत्तर प्रदेश:
igrsup.gov.in, दिल्ली:edistrict.delhigovt.nic.in, मध्य प्रदेश:mpigr.gov.in). - 'विवाह पंजीकरण (Marriage Registration)' चुनें: 'नवीन आवेदन' पर क्लिक करके अपना रजिस्ट्रेशन करें।
- वर और वधू का विवरण भरें: दोनों का नाम, पिता का नाम, जन्म तिथि, धर्म, वर्तमान पता और शादी की सही तारीख दर्ज करें।
- गवाहों की जानकारी भरें: कम से कम 2 वयस्क गवाहों (जो शादी में उपस्थित थे, रिश्तेदार या मित्र) का नाम और आधार नंबर भरें।
- दस्तावेज़ अपलोड करें: शादी का कार्ड, वर-वधू का आधार, संयुक्त फोटो और शपथ पत्र की स्कैन कॉपी (PDF/JPG) अपलोड करें।
- सरकारी शुल्क का ऑनलाइन भुगतान: ₹100 से ₹250 का निर्धारित स्टाम्प शुल्क जमा करें।
- अपॉइंटमेंट स्लॉट बुक करें: अपने नजदीकी सब-रजिस्ट्रार कार्यालय (SRO) का चयन करके अपनी सुविधानुसार तारीख और समय का स्लॉट बुक करें।
- आवेदन पावती (Acknowledgement Slip) का प्रिंट लें।
6. सब-रजिस्ट्रार ऑफिस (SRO) में क्या होता है?
- निर्धारित तिथि और समय पर वर, वधू और दोनों गवाहों को मूल दस्तावेज़ों के साथ सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में उपस्थित होना होता है।
- वहां अधिकारी के सामने वर, वधू और गवाहों के बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट और लाइव वेबकैम फोटो लिए जाते हैं।
- सभी मूल कागज़ातों का मिलान करने के बाद उप-निबंधक विवाह रजिस्टर में प्रविष्टि दर्ज करता है और डिजिटल हस्ताक्षर से प्रमाण पत्र जारी कर देता है।
7. सरकारी फीस और समय सीमा
- 30 दिन के भीतर पंजीकरण: सरकारी शुल्क मात्र ₹100 से ₹150 होता है।
- 30 से 90 दिन की देरी: ₹50 से ₹100 का अतिरिक्त विलंब शुल्क लगता है।
- 1 वर्ष से अधिक की देरी: जिला रजिस्ट्रार (ADM Finance) की विशेष अनुमति से ही पंजीकरण संभव होता है।
- समय सीमा: हिन्दू मैरिज एक्ट में SRO में सत्यापन के उसी दिन या 2 से 3 कार्यदिवसों के भीतर प्रमाण पत्र प्राप्त हो जाता है।
8. डिजिटल मैरिज सर्टिफिकेट डाउनलोड और DigiLocker में जोड़ना
- उप-निबंधक द्वारा स्वीकृति मिलते ही आपके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एसएमएस प्राप्त होता है।
- IGRS पोर्टल पर 'विवाह प्रमाण पत्र डाउनलोड/सत्यापन' में जाकर प्रमाण पत्र संख्या दर्ज करके डिजिटल सर्टिफिकेट PDF निकालें।
- DigiLocker: ऐप में 'Marriage Certificate' सर्च करें, अपना राज्य स्टाम्प विभाग चुनें और सर्टिफिकेट नंबर डालकर फेच करें। यह हमेशा के लिए कानूनी रूप से सुरक्षित हो जाएगा।
9. प्रमाण पत्र में त्रुटि सुधार की प्रक्रिया
यदि जारी प्रमाण पत्र में नाम, पिता के नाम या जन्म तिथि में कोई त्रुटि रह गई है, तो संबंधित सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में एक सुधार प्रार्थना पत्र, शुद्धता का साक्ष्य (10वीं की मार्कशीट/आधार) और नोटरी शपथ पत्र देकर रजिस्टर में संशोधन कराया जा सकता है।
11. आधिकारिक स्रोत (Official Sources)
- राष्ट्रीय सरकारी सेवा पोर्टल: services.india.gov.in
- विधि और न्याय मंत्रालय भारत सरकार: lawmin.gov.in
- डिजिटल लॉकर: digilocker.gov.in
Information Last Verified: 16 सितंबर 2026