1. चक्षु (Chakshu) पोर्टल क्या है और दूरसंचार विभाग ने इसे क्यों शुरू किया?
स्मार्टफोन और डिजिटल भुगतान क्रांति ने जहां भारत के नागरिकों का जीवन सुगम बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों और संगठित ठगों के लिए यह धोखाधड़ी का सबसे बड़ा हथियार बन चुका है। प्रतिदिन लाखों भारतीयों के मोबाइल पर अनजान नंबरों से कॉल, मिस्ड कॉल, संदिग्ध लिंक युक्त एसएमएस और व्हाट्सएप संदेश आते हैं। कभी बिजली बिल न भरने पर कनेक्शन काटने की धमकी दी जाती है, कभी बैंक खाता बंद होने का डर दिखाकर ओटीपी मांगा जाता है, तो कभी यूट्यूब वीडियो लाइक करके घर बैठे 5,000 रुपये कमाने का लालच दिया जाता है।
केंद्रीय संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग (Department of Telecommunications - DoT) ने नागरिकों को इन डिजिटल शिकारी गिरोहों से बचाने के लिए अपने नागरिक-केंद्रित पोर्टल 'संचार साथी' (Sanchar Saathi - sancharsaathi.gov.in) पर 'चक्षु' (Chakshu - Citizen Reporting of Suspected Fraud) प्रणाली शुरू की है। 'चक्षु' का शाब्दिक अर्थ होता है 'आंखें'। यह प्लेटफॉर्म आम नागरिकों को सरकार की डिजिटल आंखें बनने का अवसर देता है।
इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह 'धोखाधड़ी होने से पहले' (Pre-emptive Action) काम करता है। अब तक पुलिस और साइबर सेल तभी कार्रवाई करते थे जब किसी नागरिक के बैंक से पैसे उड़ जाते थे। लेकिन चक्षु पोर्टल पर नागरिक किसी संदिग्ध संदेश या फर्जी कॉल का केवल नंबर और स्क्रीनशॉट रिपोर्ट कर सकते हैं, जिसके आधार पर दूरसंचार विभाग उस नंबर को पूरे देश में ब्लॉक कर देता है ताकि वह किसी दूसरे भोले-भाले नागरिक को अपना शिकार न बना सके।
2. आधुनिक टेलीकॉम फ्रॉड के तौर-तरीके: डिजिटल अरेस्ट, पार्ट-टाइम जॉब और केवाईसी स्कैम
साइबर अपराधी अब सीधे बैंक का पासवर्ड नहीं मांगते, बल्कि वे मनोवैज्ञानिक भय (Fear) और अत्यधिक लालच (Greed) का उपयोग करते हैं। चक्षु पोर्टल पर रिपोर्ट किए गए आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में सबसे ज्यादा सक्रिय फ्रॉड निम्नलिखित हैं:
1. 'डिजिटल अरेस्ट' (Digital Arrest Scam)
यह हाल के वर्षों का सबसे खतरनाक और संगठित फ्रॉड है। ठग खुद को सीबीआई (CBI), नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), मुंबई पुलिस या कस्टम्स अधिकारी बताकर वीडियो कॉल करते हैं। बैकग्राउंड में पुलिस स्टेशन या सरकारी दफ्तर जैसा सेटअप होता है और वे फर्जी पुलिस वर्दी में होते हैं। वे पीड़ित से कहते हैं कि "आपके आधार नंबर से भेजे गए कूरियर में ड्रग्स और 15 जाली पासपोर्ट पकड़े गए हैं।" पीड़ित को डराकर 24 से 48 घंटे तक वीडियो कॉल पर बंधक (डिजिटल अरेस्ट) रखा जाता है और मामले को रफा-दफा करने के लिए 'सुप्रीम कोर्ट वेरिफिकेशन अकाउंट' के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपये ट्रांसफर करवा लिए जाते हैं। (नोट: भारत के कानून में 'डिजिटल अरेस्ट' नाम की कोई कानूनी व्यवस्था नहीं है।)
2. बिजली बिल कनेक्शन विच्छेदन (Electricity Bill Scam)
नागरिकों को शाम के समय एसएमएस या व्हाट्सएप आता है: "प्रिय उपभोक्ता, आपका बिजली बिल अपडेट नहीं हुआ है। आज रात 9:30 बजे आपका बिजली कनेक्शन काट दिया जाएगा। तुरंत हमारे बिजली अधिकारी 98xxxxxx पर कॉल करें।" जब घबराया हुआ नागरिक उस नंबर पर कॉल करता है, तो उसे 10 रुपये का रिचार्ज करने के बहाने एक रिमोट एक्सेस ऐप (जैसे AnyDesk या QuickSupport) डाउनलोड करवा लिया जाता है और उसका पूरा फोन हैक करके बैंक खाता खाली कर दिया जाता है।
3. पार्ट-टाइम वर्क फ्रॉम होम / टेलीग्राम टास्क फ्रॉड
व्हाट्सएप पर आकर्षक प्रोफाइल फोटो वाली विदेशी लड़कियों के नाम से मैसेज आते हैं: "घर बैठे होटल रेटिंग दें या यूट्यूब वीडियो लाइक करें और रोजाना 2,000 से 5,000 रुपये कमाएं।" शुरुआत में विश्वास जीतने के लिए 200-500 रुपये ट्रांसफर भी किए जाते हैं। बाद में टेलीग्राम ग्रुप में जोड़कर 'क्रिप्टो ट्रेडिंग' या 'टास्क पूरा करने' के नाम पर 5 लाख से 20 लाख रुपये जमा करवाकर ठग रफूचक्कर हो जाते हैं।
3. चक्षु पोर्टल पर संदिग्ध नंबर की शिकायत दर्ज करने की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया
यदि आपके फोन पर किसी भी प्रकार का संदिग्ध कॉल, मैसेज या व्हाट्सएप चैट आई है, तो उसे तुरंत डिलीट करने के बजाय चक्षु पोर्टल पर रिपोर्ट करें। इसमें मात्र 2 मिनट का समय लगता है:
चरणबद्ध रिपोर्टिंग गाइड
- अपने स्मार्टफोन या कंप्यूटर ब्राउज़र में आधिकारिक पोर्टल खोलें: sancharsaathi.gov.in/sfc या संचार साथी होमपेज पर जाकर 'Chakshu - Report Suspected Fraud Communication' पर क्लिक करें।
- संचार का माध्यम चुनें (Medium): वह विकल्प चुनें जिसके माध्यम से आपसे संपर्क किया गया—कॉल (Voice Call), एसएमएस (SMS), या व्हाट्सएप (WhatsApp)।
- धोखाधड़ी की श्रेणी चुनें (Category): ड्रॉप-डाउन मेनू में से उचित श्रेणी चुनें—जैसे 'Bank / Electricity Bill / KYC Update', 'Impersonation as Govt Official / Police', 'Lottery / Contest / Prize', 'Part-time Job Offer', या 'Sextortion / Blackmail'।
- संदिग्ध का विवरण भरें:
- जिस नंबर से कॉल या मैसेज आया, वह 10 अंकों का फोन नंबर या हेडर (जैसे AX-HDFCBK) दर्ज करें।
- कॉल या मैसेज आने की सटीक तारीख और समय चुनें।
- स्क्रीनशॉट अपलोड करें: उस फर्जी मैसेज, कॉल लॉग या व्हाट्सएप चैट का स्क्रीनशॉट (JPG/PNG फॉर्मेट, अधिकतम 5MB) अपलोड करें। यह साक्ष्य के रूप में बहुत उपयोगी होता है।
- घटना का संक्षिप्त विवरण लिखें: 500 अक्षरों में संक्षेप में लिखें कि कॉलर ने क्या कहा और उसने क्या करने को कहा।
- नागरिक सत्यापन (OTP): अपना व्यक्तिगत मोबाइल नंबर दर्ज करें और कैप्चा भरें। आपके नंबर पर आए 6 अंकों के OTP को डालकर 'Submit' करें। शिकायत दर्ज होते ही स्क्रीन पर एक यूनिक कंप्लेंट रजिस्ट्रेशन नंबर (Grievance ID) प्रदर्शित होगा।
4. आपकी शिकायत पर सरकार क्या एक्शन लेती है? सिम और IMEI ब्लॉकिंग सिस्टम
चक्षु पोर्टल पर जब देश भर के अलग-अलग नागरिकों द्वारा किसी नंबर के खिलाफ शिकायतें दर्ज की जाती हैं, तो दूरसंचार विभाग का हाई-टेक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंजन 'ASTR' (Artificial Intelligence and Facial Recognition powered Solution for Telecom SIM Subscriber Verification) सक्रिय हो जाता है:
कड़ी तकनीकी कार्रवाई का चक्र
- पैटर्न और क्लस्टर पहचान: यदि किसी एक नंबर या एक ही व्यक्ति द्वारा फर्जी पहचान पत्र पर खरीदे गए 100 सिम कार्डों से बार-बार नागरिकों को बल्क फ्रॉड कॉल किए जा रहे हैं, तो सिस्टम तुरंत उस पूरे क्लस्टर को पहचान लेता है।
- ऑपरेटर को री-वेरिफिकेशन नोटिस: दूरसंचार विभाग तुरंत संबंधित टेलीकॉम ऑपरेटर (Jio, Airtel, Vodafone Idea, BSNL) को आदेश भेजता है। ऑपरेटर उस नंबर धारक को 24 घंटे के भीतर नजदीकी स्टोर पर जाकर बायोमेट्रिक दोबारा सत्यापन (Facial Re-KYC) कराने का नोटिस जारी करता है।
- आउटगोइंग व इनकमिंग का तत्काल विच्छेदन: यदि संदिग्ध 24 घंटे में बायोमेट्रिक सत्यापन में विफल रहता है, तो उसका सिम कार्ड तुरंत डिस्कनेक्ट कर दिया जाता है।
- IMEI स्तर पर हैंडसेट ब्लैकलिस्टिंग: केवल सिम बंद करना काफी नहीं होता, क्योंकि ठग नया सिम खरीद लेते हैं। चक्षु सिस्टम उस ठग द्वारा उपयोग किए जा रहे मोबाइल फोन के हार्डवेयर IMEI नंबर को ही CEIR डेटाबेस में 'ब्लैकलिस्ट' कर देता है। इसके बाद उस मोबाइल फोन में भारत के किसी भी ऑपरेटर का कोई भी सिम कार्ड कभी काम नहीं कर सकता!
5. यदि पैसे कट चुके हों तो क्या करें? हेल्पलाइन 1930 और 'गोल्डन ऑवर' का महत्व
यहाँ एक बहुत ही महत्वपूर्ण कानूनी और तकनीकी अंतर समझना जरूरी है: चक्षु पोर्टल केवल रोकथाम (Pre-Fraud) के लिए है। यदि आपके बैंक खाते, क्रेडिट कार्ड या यूपीआई से पैसे कट चुके हैं, तो चक्षु पोर्टल पर जाने से आपके पैसे वापस नहीं आएंगे।
धोखाधड़ी के तुरंत बाद के 'गोल्डन ऑवर' (Golden Hour) में क्या करें?
साइबर अपराध की दुनिया में पैसे कटने के पहले 2 घंटे को 'गोल्डन ऑवर' कहा जाता है। इस दौरान ठग आपके पैसे को तुरंत कई म्यूल अकाउंट्स (Mule Accounts) और क्रिप्टो वॉलेट्स में घुमाने की कोशिश करते हैं। यदि आप तुरंत कार्रवाई करते हैं, तो पैसे को बीच में ही फ्रीज कराया जा सकता है:
- तत्काल 1930 पर कॉल करें: अपने फोन से तुरंत 1930 (राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन) डायल करें। यह गृह मंत्रालय के इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) द्वारा 24x7 संचालित की जाती है।
- बैंक विवरण दें: ऑपरेटर को अपनी बैंक शाखा का नाम, जिस खाते से पैसे कटे उसका नंबर, लेन-देन की तारीख व समय, यूटीआर (UTR) नंबर और जिस खाते या यूपीआई आईडी में पैसे गए, वह बताएं।
- सीएफसीएमएस (CFCMS) ऑटो-फ्रीज: 1930 हेल्पलाइन सीधे रिजर्व बैंक और सभी बैंकों के सेंट्रल फ्रॉड रिपोर्टिंग सिस्टम से जुड़ी है। जैसे ही शिकायत दर्ज होती है, सिस्टम उस बैंक खाते और वॉलेट को तुरंत फ्रीज (Hold) कर देता है जहां पैसा गया है, जिससे ठग एटीएम से कैश नहीं निकाल पाता।
- cybercrime.gov.in पर औपचारिक ई-एफआईआर: 1930 पर शिकायत के बाद आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर जाकर औपचारिक शिकायत दर्ज करें और पावती रसीद लेकर अपने नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन में संपर्क करें।
6. संचार साथी के अन्य जीवनरक्षक टूल्स: TAFCOP और CEIR का उपयोग कैसे करें?
संचार साथी पोर्टल केवल चक्षु तक सीमित नहीं है। इसमें आम नागरिक की सुरक्षा के लिए दो अन्य क्रांतिकारी डिजिटल टूल्स उपलब्ध हैं:
1. TAFCOP (Know Your Mobile Connections)
कई बार जब आप किसी दुकान से सिम कार्ड खरीदते हैं, तो शातिर दुकानदार आपके आधार फिंगरप्रिंट से एक के बजाय दो सिम जारी कर लेता है और दूसरा सिम साइबर अपराधियों को बेच देता है। TAFCOP (tafcop.sancharsaathi.gov.in) पर जाकर आप अपना मोबाइल नंबर दर्ज करके ओटीपी से चेक कर सकते हैं कि आपके आधार पर देश भर में कुल कितने सिम एक्टिव हैं। यदि कोई ऐसा नंबर दिखता है जिसे आप नहीं पहचानते, तो आप वहीं 'Not My Number' पर टिक करके उसे स्थायी रूप से बंद करवा सकते हैं।
2. CEIR (Block Stolen/Lost Mobile)
यदि आपका महंगा स्मार्टफोन कहीं गिर गया है या चोरी हो गया है, तो CEIR (ceir.sancharsaathi.gov.in) पोर्टल पर जाएं। पुलिस कंप्लेंट की डिजिटल कॉपी अपलोड करके अपने फोन के दोनों IMEI नंबर ब्लॉक कर दें। ब्लॉक होते ही चोर उस फोन में कोई भी सिम डालकर उसका उपयोग नहीं कर सकेगा। जैसे ही वह फोन चालू होगा, पुलिस को उसकी लाइव टावर लोकेशन मिल जाएगी।
7. चक्षु बनाम साइबर क्राइम 1930 बनाम ट्राई DND: कब कहाँ शिकायत करें?
नागरिकों में अक्सर यह असमंजस रहता है कि किस शिकायत के लिए किस पोर्टल या नंबर पर जाना चाहिए। नीचे दी गई तालिका में स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट किया गया है:
| समस्या की प्रकृति | कहाँ शिकायत करें? | अपेक्षित समाधान / कार्रवाई |
|---|---|---|
| संदिग्ध फर्जी कॉल, लॉटरी मैसेज, या व्हाट्सएप पर नौकरी का झांसा (पैसे नहीं कटे हैं) | चक्षु पोर्टल (sancharsaathi.gov.in) | संदिग्ध नंबर और डिवाइस का टेलीकॉम नेटवर्क से स्थायी निलंबन |
| बैंक खाते, क्रेडिट कार्ड या यूपीआई से अनधिकृत पैसे कट गए (साइबर फ्रॉड हो चुका है) | हेल्पलाइन 1930 / cybercrime.gov.in | पैसे का ट्रांजिट अकाउंट फ्रीज और पुलिस द्वारा कानूनी जांच/रिफंड प्रक्रिया |
| बैंक लोन, क्रेडिट कार्ड, इंश्योरेंस और रियल एस्टेट के वैध प्रमोशनल कॉल्स रोकना | TRAI DND 1909 / टेलीकॉम ऐप | टेलीमार्केटर को आपकी नंबर लिस्ट से हटाना और कमर्शियल कॉल्स बंद होना |
| आपके आधार पर किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा सिम कार्ड चलाए जाने का संदेह | TAFCOP पोर्टल (संचार साथी) | अनधिकृत सिम का तत्काल सत्यापन और कनेक्शन का कटना |
| स्मार्टफोन चोरी या गुम हो जाना | CEIR पोर्टल (संचार साथी) | डिवाइस का पूरे देश में सेंट्रल ब्लैकलिस्टिंग और ट्रेसिंग |
8. मोबाइल साइबर सुरक्षा के 10 सुनहरे नियम: ठगों के चंगुल से कैसे बचें?
तकनीक के साथ-साथ आपकी व्यक्तिगत सतर्कता ही साइबर सुरक्षा की सबसे मजबूत ढाल है। इन 10 नियमों को गांठ बांध लें:
- पैसे पाने के लिए कभी यूपीआई पिन (UPI PIN) नहीं लगता: हमेशा याद रखें कि यूपीआई पिन केवल आपके खाते से पैसे भेजने के लिए होता है। कोई भी लॉटरी, कैशबैक या रिफंड प्राप्त करने के लिए पिन डालने की जरूरत कभी नहीं होती।
- गूगल सर्च पर कस्टमर केयर नंबर न ढूंढें: गूगल पर जोमैटो, फ्लिपकार्ट या एसबीआई के नाम से फर्जी नंबर प्रायोजित विज्ञापनों में आते हैं। हमेशा कंपनी के आधिकारिक ऐप के 'Help & Support' सेक्शन से ही नंबर लें।
- रिमोट एक्सेस ऐप्स कभी डाउनलोड न करें: किसी अनजान कॉलर के कहने पर अपने फोन में AnyDesk, TeamViewer, RustDesk, या QuickSupport ऐप कदापि इंस्टॉल न करें।
- डिजिटल अरेस्ट से बिल्कुल न डरें: भारत का कोई भी पुलिस विभाग या सीबीआई कभी भी व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर जांच नहीं करता और न ही पैसे ट्रांसफर करने को कहता है। ऐसा कॉल आते ही तुरंत काटें और चक्षु पर रिपोर्ट करें।
- एपीके (APK) फाइल्स पर कभी क्लिक न करें: व्हाट्सएप पर शादी के कार्ड (.apk), ई-चालान (.apk) या पीएम योजना के नाम से आने वाली फाइलों को कभी डाउनलोड न करें। ये स्पाइवेयर होते हैं जो आपके बैंक के ओटीपी चुरा लेते हैं।
- इंटरनेशनल कॉल्स पर सतर्क रहें: यदि आपको +92 (पाकिस्तान), +880 (बांग्लादेश), +234 (नाइजीरिया) या अन्य विदेशी कोड से अनजान कॉल या व्हाट्सएप कॉल आए, तो उसे कभी न उठाएं।
- सिम स्वैप से बचें: यदि आपके फोन का नेटवर्क अचानक बिना कारण 'No Service' दिखाने लगे, तो तुरंत अपने ऑपरेटर और बैंक को सूचित करें; यह सिम स्वैप फ्रॉड का संकेत हो सकता है।
- मजबूत टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA): अपने व्हाट्सएप, गूगल अकाउंट और सोशल मीडिया पर एसएमएस ओटीपी के बजाय ऐप-आधारित ऑथेंटिकेटर (Google Authenticator) से 2FA ऑन रखें।
- सार्वजनिक वाई-फाई पर बैंकिंग न करें: रेलवे स्टेशन या कैफे के मुफ्त वाई-फाई पर वित्तीय लेनदेन करने से बचें।
- चक्षु पर रिपोर्ट करने की आदत डालें: फर्जी कॉल या मैसेज को केवल अनदेखा न करें; 2 मिनट निकालकर चक्षु पर दर्ज करें ताकि दूसरे नागरिक सुरक्षित रह सकें।
9. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
प्र. 1: क्या चक्षु पोर्टल पर शिकायत दर्ज करने के बाद मुझे थाने के चक्कर काटने पड़ेंगे?
उत्तर: बिल्कुल नहीं। चक्षु पोर्टल पूरी तरह से एक नागरिक खुफिया और प्रिवेंटिव सिस्टम (Intelligence Gathering Platform) है। इसमें शिकायत दर्ज करने के बाद नागरिक को किसी भी पुलिस स्टेशन या दूरसंचार कार्यालय जाने की आवश्यकता नहीं होती। DoT की स्वचालित प्रणालियां और टेलीकॉम ऑपरेटर बैकएंड पर उस नंबर का सत्यापन और ब्लॉकिंग करते हैं।
प्र. 2: यदि कोई अनजान व्यक्ति वीडियो कॉल पर खुद को पुलिस अधिकारी बताकर 'डिजिटल अरेस्ट' की धमकी दे, तो मुझे तुरंत क्या करना चाहिए?
उत्तर: सबसे पहले बिल्कुल न घबराएं और कॉल को तुरंत काट (Disconnect) दें। उस नंबर को तुरंत ब्लॉक करें और उसका स्क्रीनशॉट लेकर संचार साथी के चक्षु पोर्टल पर रिपोर्ट करें। भारत के कानून में किसी को वीडियो कॉल पर अरेस्ट करने का कोई प्रावधान नहीं है। यदि कॉलर दोबारा किसी अन्य नंबर से कॉल करके धमकाता है, तो तुरंत अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन या राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर सूचित करें।
प्र. 3: क्या सामान्य टेलीमार्केटिंग कॉल्स (जैसे बैंक लोन या बीमा पॉलिसी) की शिकायत भी चक्षु पर कर सकते हैं?
उत्तर: नहीं, चक्षु पोर्टल केवल धोखाधड़ी, साइबर अपराध, और वित्तीय ठगी से जुड़े कॉल/मैसेज के लिए है। यदि आपको किसी वैध बैंक या कंपनी के लोन, क्रेडिट कार्ड या रियल एस्टेट के अनचाहे प्रचार कॉल्स आ रहे हैं, तो इसके लिए आपको ट्राई (TRAI) के DND (Do Not Disturb) सिस्टम का उपयोग करना चाहिए। आप अपने फोन से 1909 पर कॉल या एसएमएस करके DND सक्रिय कर सकते हैं।
प्र. 4: यदि मेरे बैंक खाते से साइबर ठगों ने पैसे निकाल लिए हैं, तो क्या चक्षु पोर्टल से वे पैसे वापस मिल सकते हैं?
उत्तर: नहीं। चक्षु पोर्टल वित्तीय रिकवरी के लिए नहीं बनाया गया है। यदि आपके साथ वित्तीय धोखाधड़ी हो चुकी है, तो बिना 1 मिनट का भी समय गंवाए तुरंत 1930 डायल करें या cybercrime.gov.in पर वित्तीय फ्रॉड की शिकायत दर्ज करें ताकि पुलिस और बैंक आपके पैसों को ठग के खाते में जाने से पहले फ्रीज कर सकें।
प्र. 5: TAFCOP पोर्टल पर मेरे नाम से कोई अनजान नंबर दिखाई दे रहा है, उसे बंद कैसे करवाएं?
उत्तर: आप tafcop.sancharsaathi.gov.in पर जाएं, अपना मोबाइल नंबर डालकर ओटीपी से लॉगिन करें। स्क्रीन पर आपके आधार से जुड़े सभी नंबर दिखेंगे। जो नंबर आपका नहीं है, उसके सामने वाले बॉक्स पर टिक करें और 'Not My Number' विकल्प चुनकर 'Report' बटन पर क्लिक करें। दूरसंचार विभाग तुरंत संबंधित ऑपरेटर को उस सिम कार्ड का सत्यापन और स्थायी डिस्कनेक्शन करने का निर्देश जारी कर देगा।