news ⏱️ 18 मिनट पढ़ें 📅 24 सितंबर 2026

Semicon India 2026: भारत में घरेलू चिप मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर फैब प्लांट्स और एमएसएमई व युवाओं के लिए नौकरियों के नए अवसर

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CA विनित अग्रवाल
वरिष्ठ वित्तीय सलाहकार एवं टेक पॉलिसी विश्लेषक

चार्टर्ड एकाउंटेंट एवं टेक-फाइनेंस विश्लेषक। एमएसएमई सरकारी टेंडर्स, डीप-टेक इन्वेस्टमेंट, सेमीकंडक्टर पॉलिसी और कॉरपोरेट डिजिटल ऑटोमेशन के जाने-माने विशेषज्ञ।

⚡ त्वरित उत्तर (Quick Answer)

केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 76,000 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक 'सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम' (Semicon India Program) के अंतर्गत स्वीकृत 5 बड़े सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन (Fab) और असेंबली-टेस्टिंग (ATMP/OSAT) प्लांट्स का निर्माण कार्य गुजरात के धोलेरा व साणंद और असम के जागीरोड में युद्धस्तर पर जारी है। जानिए 28nm से लेकर 91nm के परिपक्व नोड्स (Mature Nodes) पर घरेलू चिप निर्माण, ताइवान व जापान के साथ वैश्विक रणनीतिक गठजोड़, भारतीय एमएसएमई के लिए 2 लाख करोड़ रुपये की सप्लाई चेन के अवसर, और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरों व युवाओं के लिए नौकरियों के नए रास्ते।

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📌 मुख्य विशेषताएं व आवश्यक बिंदु

  • केंद्र सरकार द्वारा 76,000 करोड़ रुपये के पूंजीगत प्रोत्साहन पैकेज (Capital Subsidy) के साथ भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) का संचालन।
  • टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और ताइवान की पीएसएमसी (PSMC) द्वारा धोलेरा (गुजरात) में 91,000 करोड़ रुपये का भारत का पहला कमर्शियल फैब प्लांट।
  • माइक्रोन टेक्नोलॉजी (Micron) का साणंद में अत्याधुनिक मेमोरी चिप पैकेजिंग प्लांट और असम के जागीरोड में टाटा का 27,000 करोड़ का ओसैट (OSAT) संयंत्र।
  • घरेलू सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में भारतीय एमएसएमई के लिए अल्ट्रा-प्योर केमिकल्स, गैस, क्लीनरूम इक्विपमेंट और टेस्टिंग में अपार संभावनाएं।
  • 300 से अधिक भारतीय इंजीनियरिंग कॉलेजों में आधुनिक ईडीए (EDA Tools) टूल्स के जरिए 85,000 वीएलएसआई (VLSI) डिजाइन इंजीनियर तैयार करने का राष्ट्रीय अभियान।
प्रोजेक्ट एवं कंपनी प्लांट का स्थान (Location) टेक्नोलॉजी पार्टनर (Country) कुल निवेश (Outlay) उत्पाद फोकस एवं चिप नोड्स
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स फैब (TEPL Mega Fab) धोलेरा (विशेष निवेश क्षेत्र), गुजरात PSMC (ताइवान - Powerchip Semiconductor) 91,000 करोड़ रुपये 28nm, 40nm, 55nm, 91nm (पावर मैनेजमेंट, ऑटोमोटिव, डिस्प्ले चिप्स)
माइक्रोन असेंबली व टेस्ट (Micron ATMP) साणंद (GIDC), गुजरात Micron Technology (USA) 22,500 करोड़ रुपये (2.75 बिलियन डॉलर) DRAM एवं NAND फ्लैश मेमोरी मॉड्यूल और एसएसडी पैकेजिंग
टाटा सेमीकंडक्टर असेंबली (TSAT OSAT) जागीरोड (मोरीगांव), असम Tata Sons (इन-हाउस ग्लोबल टीम्स) 27,000 करोड़ रुपये एडवांस्ड सेमीकंडक्टर पैकेजिंग (Flip-Chip, ISIP - ईवी व टेलीकॉम हेतु)
सीजी पावर - रेनेसास ओसैट (CG Power OSAT) साणंद, गुजरात Renesas (जापान) व Stars Micro (थाईलैंड) 7,600 करोड़ रुपये कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, इंडस्ट्रियल ड्राइव्स और 5G नेटवर्क चिप्स
केन्स सेमीकॉन ओसैट (Kaynes Semicon) साणंद, गुजरात Kaynes Technology (India/Global) 3,300 करोड़ रुपये स्मार्ट मीटर, ऑटोमोटिव सेंसर्स और डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स पैकेजिंग

📑 विषय सूची (Table of Contents)

1. सेमीकंडक्टर की वैश्विक भू-राजनीति: भारत के लिए 'सिलिकॉन संप्रभुता' क्यों अनिवार्य है?

21वीं सदी की दुनिया में जो महत्व 20वीं सदी में कच्चे तेल (Crude Oil) का था, ठीक वही रणनीतिक और आर्थिक महत्व आज सेमीकंडक्टर चिप्स (Silicon Chips) का है। आपके हाथ में मौजूद स्मार्टफोन से लेकर सड़क पर दौड़ती कारों, लड़ाकू विमानों, अस्पतालों की एमआरआई मशीनों, मिसाइल गाइडेंस सिस्टम और 5G टेलीकॉम टावरों तक—दुनिया की कोई भी आधुनिक मशीन बिना सेमीकंडक्टर चिप के एक सेकंड भी काम नहीं कर सकती।

वर्ष 2020-2022 में कोविड महामारी और भू-राजनीतिक तनावों के दौरान दुनिया ने 'ग्लोबल चिप शॉर्टेज' (Global Chip Crisis) का भयावह मंजर देखा था। चिप्स की कमी के कारण भारत की ऑटोमोबाइल कंपनियों को 6 से 9 महीने की लंबी वेटिंग रखनी पड़ी और करोड़ों डॉलर का औद्योगिक नुकसान हुआ। इसके साथ ही दुनिया के 70% से अधिक एडवांस्ड चिप्स अकेले ताइवान (TSMC) में बनते हैं। ताइवान जलडमरूमध्य में तनाव या युद्ध की स्थिति में पूरी दुनिया की इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन एक झटके में ध्वस्त हो सकती है।

इसीलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने 'चिप संप्रभुता' (Silicon Sovereignty) हासिल करने का राष्ट्रीय संकल्प लिया। दिसंबर 2021 में भारत सरकार ने 76,000 करोड़ रुपये (लगभग 10 बिलियन डॉलर) के 'सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम' (Semicon India Programme) को अधिसूचित किया, जिसके तहत भारत सरकार किसी भी फैब या ओसैट प्लांट की कुल स्थापना लागत का 50% सीधा वित्तीय अनुदान (Fiscal Support on Pari-Passu Basis) सीधे अपने खजाने से दे रही है। साथ ही राज्य सरकारें (जैसे गुजरात और असम) अतिरिक्त 20% से 25% की कैपिटल सब्सिडी, सस्ती बिजली और मुफ्त पानी उपलब्ध करा रही हैं।

2. भारत के 5 स्वीकृत सेमीकंडक्टर प्लांट्स का जमीनी जायजा: धोलेरा, साणंद और जागीरोड

इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) के तहत भारत में 5 विशालकाय सेमीकंडक्टर विनिर्माण परियोजनाओं को पूर्ण केंद्रीय मंजूरी मिल चुकी है और इन सभी पर जमीनी स्तर पर निर्माण कार्य तीव्र गति से चल रहा है:

1. टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और पीएसएमसी का कमर्शियल फैब (धोलेरा, गुजरात)

भारत का पहला मेगा फैब्रिकेशन प्लांट टाटा ग्रुप द्वारा ताइवान की विख्यात सेमीकंडक्टर कंपनी Powerchip Semiconductor Manufacturing Corporation (PSMC) के सहयोग से गुजरात के धोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन (SIR) में स्थापित किया जा रहा है। 91,000 करोड़ रुपये के कुल निवेश से बनने वाले इस प्लांट की उत्पादन क्षमता 50,000 वेफर्स प्रति माह होगी। यहाँ 28nm, 40nm, 55nm और 91nm के परिपक्व नोड्स पर चिप्स का निर्माण होगा जो ऑटोमोटिव, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और 5G कम्युनिकेशंस में काम आएंगे।

2. माइक्रोन टेक्नोलॉजी का एडवांस्ड ATMP प्लांट (साणंद, गुजरात)

अमेरिका की दिग्गज मेमोरी चिप निर्माता Micron Technology द्वारा 22,500 करोड़ रुपये (2.75 बिलियन डॉलर) की लागत से साणंद औद्योगिक क्षेत्र में दुनिया का सबसे आधुनिक असेंबली और टेस्टिंग प्लांट बनाया जा रहा है। यहाँ वेफर्स को काटकर उन्हें स्मार्टफोन और कंप्यूटर में लगने वाले DRAM मेमोरी मॉड्यूल्स और NAND सॉलिड स्टेट ड्राइव्स (SSD) में पैकेज किया जाएगा।

3. टाटा सेमीकंडक्टर असेंबली एवं टेस्ट - TSAT (जागीरोड, असम)

पूर्वोत्तर भारत के औद्योगिक इतिहास में सबसे बड़ा निजी निवेश करते हुए टाटा संस असम के मोरीगांव जिले के जागीरोड में 27,000 करोड़ रुपये का विशाल OSAT प्लांट स्थापित कर रही है। यह प्लांट प्रतिदिन 4.8 करोड़ चिप्स की पैकेजिंग करेगा, जो विशेष रूप से इलेक्ट्रिक वाहनों (EV), सौर इनवर्टर और रक्षा उपकरणों में उपयोग किए जाएंगे।

4. सीजी पावर, रेनेसास और स्टार्स माइक्रो ओसैट (साणंद, गुजरात)

मुरुगप्पा समूह की सीजी पावर ने जापान की दिग्गज चिप डिजाइनर कंपनी Renesas Electronics और थाईलैंड की Stars Microelectronics के साथ मिलकर 7,600 करोड़ रुपये की लागत से स्पेशलाइज्ड चिप पैकेजिंग प्लांट शुरू किया है।

5. केन्स सेमीकॉन ओसैट यूनिट (साणंद, गुजरात)

भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग कंपनी केन्स टेक्नोलॉजी (Kaynes Semicon) 3,300 करोड़ रुपये के निवेश से ऑटोमोटिव और स्मार्ट पावर मीटरिंग चिप्स की पैकेजिंग के लिए आधुनिक संयंत्र तैयार कर रही है।

3. फैब (Fab) बनाम ओसैट (OSAT/ATMP): वेफर निर्माण और पैकेजिंग में क्या अंतर होता है?

सामान्य नागरिकों और विद्यार्थियों के लिए सेमीकंडक्टर उद्योग की शब्दावली को समझना थोड़ा कठिन होता है। चिप निर्माण मूलतः दो बड़े चरणों में बंटा होता है:

1. सेमीकंडक्टर फैब (Semiconductor Fabrication - Front-End)

यह इस उद्योग का सबसे जटिल, खर्चीला और अति-उच्च तकनीक वाला हिस्सा है (जैसे धोलेरा में टाटा का प्लांट)। यहाँ शुद्ध सिलिकॉन के बड़े-बड़े गोल वेफर्स (Silicon Wafers) पर अत्यंत शक्तिशाली अल्ट्रा-वॉयलेट (DUV/EUV) लेजर किरणों और फोटोलिथोग्राफी मशीनों की सहायता से नैनोमीटर स्तर के अरबों ट्रांजिस्टर उकेरे जाते हैं। यह कार्य ऐसे विशेष 'क्लीनरूम' (Cleanrooms) में होता है जहाँ हवा में धूल का एक भी कण नहीं होता (अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर से 10,000 गुना ज्यादा स्वच्छ)।

2. ओसैट / एटीएमपी (OSAT / ATMP - Back-End)

ओसैट का पूरा नाम Outsourced Semiconductor Assembly and Test और एटीएमपी का नाम Assembly, Testing, Marking, and Packaging होता है (जैसे साणंद में माइक्रोन का प्लांट)। जब फैब से सिलिकॉन वेफर बनकर तैयार हो जाता है, तो उसे ओसैट प्लांट में भेजा जाता है। यहाँ हीरे की आरी या लेजर से वेफर को बारीक चिप्स में काटा जाता है (Dicing), उसके चारों ओर सोने या तांबे के अत्यंत सूक्ष्म तार जोड़े जाते हैं (Wire Bonding), उसे काले रंग की सुरक्षात्मक रेजिन केसिंग में सील किया जाता है और बिजली के झटके व तापमान देकर उसकी 100% गुणवत्ता परखी जाती है। इसके बाद ही चिप मदरबोर्ड पर लगाने के लिए तैयार होती है।

4. 28nm से 91nm नोड्स की रणनीति: स्मार्टफोन से लेकर इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) तक मांग

अक्सर मीडिया में 3 नैनोमीटर (3nm) या 2 नैनोमीटर के एडवांस्ड चिप्स की चर्चा होती है जो केवल आईफोन या एनवीडिया के एआई सुपरकंप्यूटर्स में लगते हैं। तो फिर भारत ने 28nm और 40nm जैसे 'परिपक्व नोड्स' (Mature Nodes) को क्यों चुना?

इसके पीछे भारत सरकार की अत्यंत चतुर और व्यावहारिक आर्थिक रणनीति है:

  • वैश्विक चिप मांग का 70% हिस्सा: दुनिया में उपयोग होने वाले 70% से अधिक सेमीकंडक्टर चिप्स 28 नैनोमीटर या उससे बड़े नोड्स पर बनते हैं।
  • ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रिक वाहन (EV): एक सामान्य पेट्रोल या डीजल कार में 300 से 500 चिप्स लगते हैं, जबकि एक आधुनिक इलेक्ट्रिक कार में 1,500 से 3,000 चिप्स लगते हैं। कार के एबीएस ब्रेक, एयरबैग, पावर स्टीयरिंग, बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) और मोटर कंट्रोलर में 28nm, 40nm और 65nm के चिप्स ही उपयोग होते हैं क्योंकि ये अत्यधिक तापमान और झटकों में सबसे ज्यादा टिकाऊ और सुरक्षित होते हैं।
  • टेलीकॉम, रेलवे और पावर ग्रिड: 5G बेस स्टेशन, स्मार्ट बिजली मीटर, ट्रेन का कवच (Kavach) सुरक्षा सिस्टम, और सौर ऊर्जा के इनवर्टर सभी इन्हीं परिपक्व चिप्स पर चलते हैं।
  • लागत और कमर्शियल वायबिलिटी: 28nm के प्लांट को तुरंत लाभदायक बनाया जा सकता है, जबकि 3nm के प्लांट में अरबों डॉलर के नुकसान का जोखिम रहता है। भारत पहले अपनी घरेलू बुनियादी जरूरतों को पूरा कर रहा है।

5. भारतीय एमएसएमई (MSME) के लिए 2 लाख करोड़ की सप्लाई चेन के सुनहरे अवसर

एक सेमीकंडक्टर फैब प्लांट कभी अकेला काम नहीं कर सकता। उसके चारों ओर कम से कम 500 से 1,000 सहायक सहायक उद्योग (Ancillary MSME Industries) विकसित होते हैं। भारत में बनने वाले इन 5 प्लांट्स से देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए अगले 5 वर्षों में 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक के नए व्यापारिक अवसर पैदा हो रहे हैं:

एमएसएमई के लिए प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र

  1. अल्ट्रा-प्योर गैसेस (Ultra-Pure Industrial Gases): फैब में 99.9999% शुद्ध नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, आर्गन और हाइड्रोजन गैसों की निरंतर सप्लाई चाहिए। स्थानीय केमिकल और गैस सप्लायर्स के लिए यह अरबों का बाजार है।
  2. अल्ट्रा-प्योर वाटर (UPW) और एफ्लुएंट ट्रीटमेंट: एक फैब को प्रतिदिन लाखों लीटर पानी चाहिए जो पूरी तरह मिनरल-मुक्त हो। वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाने वाले एमएसएमई के लिए यह बहुत बड़ा क्षेत्र है।
  3. प्रिसिजन मशीनिंग और टूलिंग (Precision Tooling): स्टेनलेस स्टील और क्वार्ट्ज के अति-सूक्ष्म पार्ट्स, वेफर कैसेट्स और रोबोटिक आर्म्स के स्पेयर पार्ट्स की स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग।
  4. क्लीनरूम गारमेंट्स और कंज्यूमेबल्स: क्लीनरूम में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए एंटी-स्टैटिक बन्नी सूट्स, विशेष ग्लव्स, मास्क और वैक्यूम पैकेजिंग सामग्री।
  5. पीसीबी असेंबली और टेस्टिंग सर्विसेज: पैकेज्ड चिप्स को सर्किट बोर्ड पर लगाने के लिए एसएमटी (Surface Mount Technology) लाइनों का विस्तार।

6. युवाओं और इंजीनियर्स के लिए नौकरियां: VLSI डिजाइन से लेकर फैब ऑपरेटर तक

सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम देश के युवाओं के लिए लाखों उच्च-वेतन वाली नौकरियों (High-Paying Tech Jobs) का नया क्षितिज खोल रहा है:

भारत सेमीकंडक्टर वर्कफोर्स डेवलपमेंट प्रोग्राम

भारत के पास पहले से ही दुनिया के 20% शीर्ष सेमीकंडक्टर डिजाइन इंजीनियर्स मौजूद हैं (इंटेल, क्वालकॉम, एनवीडिया, टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स के बैंगलोर और हैदराबाद के डिजाइन सेंटर्स में लाखों भारतीय चिप डिजाइन करते हैं)। लेकिन अब सरकार विनिर्माण (Manufacturing) और फैब ऑपरेशंस के लिए भी युवाओं को तैयार कर रही है:

  • 300+ इंजीनियरिंग कॉलेजों में वीएलएसआई करिकुलम: एआईसीटीई (AICTE) ने बी.टेक और डिप्लोमा स्तर पर 'VLSI Design & Semiconductor Technology' के नए कोर्स शुरू किए हैं।
  • मुफ्त ईडीए (EDA Tools) सॉफ्टवेयर: विश्व की शीर्ष सॉफ्टवेयर कंपनियों—Synopsys, Cadence और Siemens EDA—के करोड़ों रुपये के चिप डिजाइनिंग टूल्स भारतीय कॉलेजों को सरकार द्वारा नाममात्र शुल्क पर उपलब्ध कराए गए हैं।
  • जॉब प्रोफाइल्स और सैलरी:
    • VLSI डिजाइन इंजीनियर: शुरुआती पैकेज 8 लाख से 15 लाख रुपये प्रति वर्ष।
    • फैब प्रोसेस एवं यील्ड इंजीनियर: 10 लाख से 20 लाख रुपये प्रति वर्ष।
    • क्लीनरूम ऑपरेटर एवं तकनीशियन: आईटीआई और पॉलिटेक्निक डिप्लोमा धारकों के लिए 3.5 लाख से 6 लाख रुपये प्रति वर्ष।

7. भारत के सभी 5 सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स का विस्तृत मास्टर चार्ट

नीचे दी गई तालिका में भारत में स्थापित हो रहे सभी 5 सेमीकंडक्टर संयंत्रों की विस्तृत तुलना दी गई है:

परियोजना स्थान एवं राज्य श्रेणी (Type) दैनिक / मासिक उत्पादन क्षमता अपेक्षित प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार
टाटा-पीएसएमसी फैब धोलेरा, गुजरात कमर्शियल वेफर फैब 50,000 वेफर्स प्रति माह 20,000 से अधिक कुशल नौकरियां
माइक्रोन टेक्नोलॉजी साणंद, गुजरात मेमोरी ATMP / ओसैट लाखों मेमोरी मॉड्यूल्स प्रति दिन 5,000 प्रत्यक्ष + 15,000 सहायक नौकरियां
टाटा ओसैट (TSAT) जागीरोड, असम एडवांस्ड पैकेजिंग ओसैट 4.83 करोड़ चिप्स प्रति दिन 27,000 से अधिक नौकरियां (पूर्वोत्तर का सबसे बड़ा केंद्र)
सीजी पावर - रेनेसास साणंद, गुजरात स्पेशलाइज्ड ओसैट 1.5 करोड़ चिप्स प्रति दिन 5,000 से अधिक नौकरियां
केन्स सेमीकॉन साणंद, गुजरात ऑटोमोटिव ओसैट 60 लाख चिप्स प्रति दिन 3,000 से अधिक नौकरियां

8. सेमीकॉन इंडिया 2.0 और भविष्य का रोडमैप (Silicon Carbide & GaN)

भारत सरकार केवल सिलिकॉन तक सीमित नहीं रह रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्रालय पहले से ही 'सेमीकॉन इंडिया 2.0' (Semicon 2.0) की नीति पर काम कर रहा है, जिसमें इलेक्ट्रिक वाहनों और हाई-स्पीड ट्रेनों के लिए कंपाउंड सेमीकंडक्टर्स (Compound Semiconductors)—जैसे सिलिकॉन कार्बाइड (SiC) और गैलियम नाइट्राइड (GaN)—के निर्माण पर विशेष सब्सिडी दी जाएगी। ये चिप्स सामान्य सिलिकॉन की तुलना में 10 गुना ज्यादा वोल्टेज और गर्मी सहन कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त भारत का लक्ष्य 2030 तक 7 नैनोमीटर के एडवांस्ड फैब की ओर कदम बढ़ाना है।

9. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

प्र. 1: भारत में बने स्वदेशी सेमीकंडक्टर चिप्स बाजार में कब तक उपलब्ध होंगे?

उत्तर: माइक्रोन टेक्नोलॉजी के साणंद प्लांट से पहले 'मेड इन इंडिया' पैकेज्ड मेमोरी चिप्स का वाणिज्यिक उत्पादन 2025 के अंत तक शुरू होने का लक्ष्य है, जबकि धोलेरा में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के कमर्शियल वेफर फैब प्लांट से पहली स्वदेशी सिलिकॉन वेफर चिप्स 2026 के मध्य तक बाजार में आ जाएंगी।

प्र. 2: क्या भारत में चिप्स बनने से स्मार्टफोन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण सस्ते हो जाएंगे?

उत्तर: हाँ, निश्चित रूप से। वर्तमान में भारत अपनी जरूरत के 100% सेमीकंडक्टर चिप्स विदेशों (ताइवान, चीन, दक्षिण कोरिया) से आयात करता है, जिस पर भारी आयात शुल्क (Import Duty), शिपिंग फ्रेट और मुद्रा विनिमय दर का खर्च जुड़ता है। घरेलू उत्पादन शुरू होने से लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी और सप्लाई चेन में स्थिरता आने से मोबाइल, टीवी, कार और एसी की कीमतों में 8% से 15% तक की कमी संभव होगी।

प्र. 3: क्या एक आम इंजीनियरिंग छात्र सेमीकंडक्टर उद्योग में नौकरी पा सकता है?

उत्तर: बिल्कुल। इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन (ECE), इलेक्ट्रिकल (EE), मैकेनिकल, केमिकल इंजीनियरिंग, और कंप्यूटर साइंस (CSE) के छात्रों के लिए सेमीकंडक्टर उद्योग में असीम संभावनाएं हैं। आप कॉलेज के दौरान VLSI डिजाइन, Verilog/VHDL कोडिंग, सेमीकंडक्टर डिवाइस फिजिक्स या क्लीनरूम प्रोटोकॉल के ऑनलाइन सर्टिफिकेशन (जैसे NPTEL या FutureSkills PRIME से) करके इन मल्टीनेशनल प्लांट्स में सीधे प्लेसमेंट पा सकते हैं।

प्र. 4: एक सेमीकंडक्टर फैब प्लांट चलाने के लिए किन दो प्राकृतिक संसाधनों की सबसे ज्यादा आवश्यकता होती है?

उत्तर: चिप विनिर्माण के लिए दो संसाधन सबसे महत्वपूर्ण हैं: 1. अति-शुद्ध पानी (Ultra-Pure Water): वेफर्स को साफ करने के लिए प्रतिदिन लाखों लीटर खनिज-रहित पानी की जरूरत होती है। 2. निर्बाध विद्युत आपूर्ति (Zero-Flicker Power): फैब में बिजली का वोल्टेज एक मिलीसेकंड के लिए भी कम नहीं होना चाहिए; बिजली जाने पर लाखों डॉलर के वेफर्स एक सेकंड में नष्ट हो जाते हैं। गुजरात सरकार और असम सरकार ने इन प्लांट्स के लिए डेडिकेटेड कैप्टिव पावर सब-स्टेशन और पाइपलाइन नेटवर्क स्थापित किए हैं।

प्र. 5: भारत सरकार की चिप डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (DLI Scheme) क्या है?

उत्तर: डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (DLI) योजना के तहत भारत सरकार घरेलू स्टार्टअप्स और एमएसएमई को नई चिप डिजाइन करने के लिए पात्र खर्च का 50% वित्तीय प्रतिपूर्ति (अधिकतम 15 करोड़ रुपये प्रति आवेदन) सीधे प्रदान करती है। साथ ही सफल चिप उत्पादन होने पर 5 वर्षों तक शुद्ध बिक्री टर्नओवर पर 4% से 6% का अतिरिक्त प्रोत्साहन देती है ताकि भारतीय इंजीनियर वैश्विक स्तर की पेटेंटेड चिप्स बना सकें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q. भारत में बने स्वदेशी चिप्स बाजार में कब तक उपलब्ध होंगे?

A. साणंद में माइक्रोन प्लांट से 2025 के अंत में और धोलेरा के टाटा फैब से 2026 के मध्य तक मेड-इन-इंडिया चिप्स का वाणिज्यिक उत्पादन शुरू हो जाएगा।

Q. क्या भारत में चिप निर्माण से मोबाइल और गैजेट्स सस्ते होंगे?

A. हाँ, आयात शुल्क और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लागत खत्म होने से इलेक्ट्रॉनिक्स व ऑटोमोबाइल उत्पादों में 8% से 15% तक लागत में कमी आ सकती है।

Q. क्या सामान्य इंजीनियरिंग छात्र सेमीकंडक्टर क्षेत्र में करियर बना सकते हैं?

A. बिल्कुल, ECE, EE, केमिकल और मैकेनिकल इंजीनियर्स के लिए वीएलएसआई डिजाइन, फैब प्रोसेस और टेस्टिंग में लाखों नौकरियों के अवसर खुल रहे हैं।

Q. चिप फैब के लिए कौन से दो प्राकृतिक संसाधन सबसे जरूरी हैं?

A. अति-शुद्ध पानी (Ultra-Pure Water) और बिना किसी रुकावट की 24x7 स्थिर विद्युत आपूर्ति (Zero-Flicker Power) अनिवार्य है।

Q. डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (DLI) स्कीम क्या है?

A. चिप डिजाइन करने वाले भारतीय स्टार्टअप्स को सरकार डिजाइन खर्च का 50% (अधिकतम 15 करोड़ रु) अनुदान और बिक्री पर 4-6% इंसेंटिव देती है।

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