yojana ⏱️ 15 मिनट पढ़ें 📅 24 सितंबर 2026

Sujalam Bharat Digital Platform: जल जीवन मिशन के तहत पानी की शुद्धता और सप्लाई का नया डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम, ग्राम पंचायत से लेकर नागरिक स्तर तक गाइड

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राजेश कुमार मीना
वरिष्ठ नीति एवं ग्रामीण विकास विश्लेषक

विगत 8 वर्षों से केंद्र व राज्य सरकारों की कल्याणकारी योजनाओं, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT), ग्रामीण विकास एवं डिजिटल भुगतान प्रणालियों पर निरंतर शोधपरक विश्लेषण।

⚡ त्वरित उत्तर (Quick Answer)

सुजलाम भारत डिजिटल प्लेटफॉर्म जल जीवन मिशन के तहत विकसित एक एकीकृत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) है। यह ग्रामीण भारत के 15 करोड़ से अधिक नल कनेक्शनों में जलापूर्ति की नियमितता, पानी के दबाव और रासायनिक व जैविक शुद्धता की वास्तविक समय (Real-time) IoT सेंसरों और फील्ड टेस्टिंग किट (FTK) डेटा के जरिए 24x7 ऑनलाइन निगरानी सुनिश्चित करता है।

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📌 मुख्य विशेषताएं व आवश्यक बिंदु

  • जल जीवन मिशन के तहत 15 करोड़ से अधिक ग्रामीण घरों में नल से जल की गुणवत्ता मापने का नया नेशनल डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI)।
  • IoT फ्लो सेंसर और टेलीमेट्री नेटवर्क के माध्यम से हर गांव में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 55 लीटर शुद्ध पेयजल की उपलब्धता का लाइव डेटा।
  • वाटर क्वालिटी मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (WQMIS) के 2,000+ परीक्षण प्रयोगशालाओं का डेटा सीधे सुजलाम भारत से लिंक।
  • प्रत्येक ग्राम पंचायत में 5 प्रशिक्षित 'जल सहेलियों' द्वारा फील्ड टेस्ट किट (FTK) से 8 रासायनिक मानकों की नियमित जांच।
  • नागरिक अपने गांव का नाम चुनकर दैनिक आपूर्ति समय, क्लोरीन स्तर, टीडीएस और प्रेशर रिपोर्ट अपने मोबाइल पर ऑनलाइन देख सकते हैं।
जांच मानक (Parameter) भारतीय मानक ब्यूरो (BIS 10500:2012) सीमा अधिकता का स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव सुजलाम भारत में सुधार का उपाय
pH मान (अम्लता/क्षारीयता) 6.5 से 8.5 कम होने पर पाइपलाइन क्षरण, अधिक होने पर पेट व त्वचा में जलन वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में लाइम/सोडा ऐश डोजिंग द्वारा संतुलन
TDS (कुल घुलित ठोस) 500 mg/L (स्वीकार्य), 2000 mg/L (अधिकतम) खारा स्वाद, गुर्दे की पथरी और पाचन तंत्र की समस्याएं रिवर्स ऑस्मोसिस (RO) या डीसेलिनेशन प्लांट की स्थापना
फ्लोराइड (Fluoride) 1.0 mg/L (अधिकतम 1.5 mg/L) दांतों का पीलापन व सड़न, हड्डियों की विकृति (फ्लोरोसिस) नलगोंडा तकनीक या एक्टिवेटेड एल्युमिना डी-फ्लोराइडेशन यूनिट
आर्सेनिक (Arsenic) 0.01 mg/L (कठोर सीमा) त्वचा कैंसर, ब्लैकफुट रोग, फेफड़ों व लिवर को गंभीर क्षति आर्सेनिक रिमूवल प्लांट्स (ARP) और गहरे सुरक्षित एक्वीफर से जल दोहन
अवशिष्ट क्लोरीन (Residual Chlorine) 0.2 से 0.5 mg/L (नल के मुहाने पर) कम होने पर बैक्टीरिया संक्रमण (हैजा, पीलिया, टायफाइड) ग्राम टंकी पर ऑटोमैटिक ऑनलाइन क्लोरीनेटर से सटीक डोजिंग
ई-कोलाई व कोलीफॉर्म बैक्टीरिया शून्य (0 CFU/100 ml पानी) तीव्र डायरिया, पेचिश, गैस्ट्रोएंटेराइटिस और जलजनित महामारियां सोडियम हाइपोक्लोराइट विसंक्रमण व तत्काल स्रोत सैनिटाइजेशन

1. सुजलाम भारत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI): क्या है और इसकी जरूरत क्यों पड़ी?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 15 अगस्त 2019 को लाल किले की प्राचीर से घोषित 'जल जीवन मिशन' (Jal Jeevan Mission - Har Ghar Jal) ने ग्रामीण भारत के बुनियादी ढांचे में एक ऐतिहासिक क्रांति ला दी है। योजना शुरू होने के समय देश के मात्र 3.23 करोड़ (लगभग 17%) ग्रामीण परिवारों के घरों में नल से पानी आता था। आज यह आंकड़ा बढ़कर 15 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों तक पहुंच चुका है, यानी 78% से अधिक ग्रामीण भारत को नल के सुरक्षित जल से आच्छादित किया जा चुका है।

लेकिन जैसे ही नल के पाइप बिछाने और कनेक्शन देने का भौतिक लक्ष्य पूरा होने के करीब पहुंचा, सरकार के सामने एक नई और गंभीर चुनौती खड़ी हुई—सप्लाई की निरंतरता (Service Delivery) और पानी की रासायनिक व जैविक शुद्धता (Water Quality)। यदि पाइपलाइन में पानी न आए, दबाव कम हो, या पानी में फ्लोराइड, आर्सेनिक अथवा बैक्टीरिया मिला हो, तो नल कनेक्शन का कोई व्यावहारिक औचित्य नहीं रह जाता।

इसी समस्या के स्थायी तकनीकी समाधान के रूप में जल शक्ति मंत्रालय के राष्ट्रीय जल जीवन मिशन (NJJM) ने इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) और नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) के सहयोग से 'सुजलाम भारत डिजिटल प्लेटफॉर्म' (Sujalam Bharat Digital Platform) तैयार किया है। यह कोई साधारण वेबसाइट नहीं है, बल्कि आधार और यूपीआई की तर्ज पर पानी के लिए भारत का पहला डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) है, जो देश के हर गांव, हर जल स्रोत, हर ओवरहेड टैंक और हर घरेलू नल को एक सेंट्रल क्लाउड नेटवर्क से जोड़ता है।

2. IoT आधारित स्मार्ट फ्लो सेंसर और ऑटोमैटिक डेटा कैप्चरिंग तकनीक

सुजलाम भारत प्लेटफॉर्म की सबसे बड़ी ताकत इसका इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) आधारित स्मार्ट सेंसर आर्किटेक्चर है। देश के हजारों गांवों में पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद अब इसे देशव्यापी स्तर पर लागू किया जा रहा है:

सेंसर कैसे काम करते हैं?

  • अल्ट्रासोनिक फ्लो मीटर (Ultrasonic Flow Meters): ये सेंसर पानी की मुख्य पाइपलाइन और गांवों के वितरण नेटवर्क (Distribution Network) में लगे होते हैं। ये बिना पानी के प्रवाह में बाधा डाले अल्ट्रासोनिक तरंगों के जरिए यह नापते हैं कि टंकी से कितना पानी निकला और किस गली या मोहल्ले में कितना पानी पहुंचा।
  • प्रेशर ट्रांसमीटर (Pressure Transmitters): पानी की आपूर्ति में सबसे बड़ी शिकायत यह होती है कि लाइन के अंत में स्थित घरों (Tail-end households) तक पानी नहीं पहुंचता। ये सेंसर लगातार पाइपलाइन के हाइड्रोस्टैटिक प्रेशर को मापते हैं। यदि दबाव निर्धारित 0.7 बार (Bar) से कम होता है, तो सिस्टम में तुरंत चेतावनी दर्ज हो जाती है।
  • रेसिडुअल क्लोरीन एनालाइजर (Chlorine Sensors): पानी में रोगजनक जीवाणुओं को मारने के लिए ब्लीचिंग पाउडर या सोडियम हाइपोक्लोराइट मिलाया जाता है। ये सेंसर यह सुनिश्चित करते हैं कि नागरिक के नल पर पहुंचने वाले पानी में 0.2 से 0.5 मिलीग्राम प्रति लीटर क्लोरीन अवश्य मौजूद रहे, जो सुरक्षित सीमा मानी जाती है।
  • टेलीमेट्री गेटवे और जीएसएम मॉडेम: सेंसर द्वारा रिकॉर्ड किया गया डेटा सोलर-पावर्ड टेलीमेट्री बॉक्स के माध्यम से हर 15 मिनट में सुरक्षित 4G/5G या सैटेलाइट नेटवर्क के जरिए केंद्रीय सुजलाम भारत डेटाबेस को भेजा जाता है।

इस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यदि किसी गांव में मोटर खराब हो जाए, बिजली न होने से पानी न चढ़े, या पाइपलाइन फट जाए, तो ब्लॉक इंजीनियर और ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति (VWSC) को किसी के शिकायत करने से पहले ही ऑटोमैटिक एसएमएस और पोर्टल अलर्ट मिल जाता है।

3. WQMIS लैब इंटीग्रेशन और 2,000+ टेस्टिंग प्रयोगशालाओं का नेटवर्क

पानी केवल आना ही काफी नहीं है, उसका जहरमुक्त और रोगमुक्त होना जीवन और मृत्यु का प्रश्न है। भारत के कई भूभागों में भूजल में प्राकृतिक रूप से फ्लोराइड, आर्सेनिक, अत्यधिक आयरन, नाइट्रेट और लवणीयता (Salinity) पाई जाती है। इसके समाधान के लिए वाटर क्वालिटी मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (WQMIS - neer.gov.in) को सुजलाम भारत प्लेटफॉर्म में पूरी तरह इंटीग्रेट कर दिया गया है।

लैब नेटवर्क का डिजिटल वर्कफ़्लो

  1. 2,000 से अधिक NABL-मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाएं: देश के हर जिले और सब-डिवीजन में आधुनिक जल परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं, जिन्हें नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज (NABL) से मान्यता प्राप्त है।
  2. नमूना संग्रह और बारकोडिंग: लैब तकनीशियन गांव के जल स्रोतों (बोरवेल, कुएं, फिल्टर प्लांट) से पानी के सैंपल लेते हैं और मौके पर ही सैंपल बोतल पर बारकोड चिपकाकर उसे जियो-टैग करते हैं।
  3. कंप्यूटराइज्ड टेस्टिंग: आधुनिक स्पेक्ट्रोफोटोमीटर और क्रोमैटोग्राफी मशीनों से 14 भौतिक-रासायनिक और 2 जीवाणु मानकों की जांच होती है। जांच का परिणाम लैब के कंप्यूटर से सीधे क्लाउड में अपलोड होता है, जिससे किसी भी स्तर पर आंकड़ों में हेरफेर संभव नहीं है।
  4. नागरिकों के लिए खुला डेटा: यदि किसी स्रोत के पानी में आर्सेनिक या नाइट्रेट की मात्रा सुरक्षित सीमा से अधिक पाई जाती है, तो सिस्टम उस स्रोत को तुरंत 'असुरक्षित (Red Flagged)' घोषित कर देता है और वहां से सप्लाई तुरंत रोककर वैकल्पिक स्रोत या शोधन संयंत्र शुरू करने का आदेश जारी हो जाता है।

4. ग्राम पंचायत स्तर पर जल सहेलियां: FTK फील्ड टेस्ट किट और 8 मानकों की जांच

सुजलाम भारत प्लेटफॉर्म की एक अद्भुत सामाजिक विशेषता यह है कि इसने जल गुणवत्ता की निगरानी को दिल्ली या राज्य की राजधानियों के अफसरों के हाथ से निकालकर गांव की साधारण महिलाओं के हाथों में सौंप दिया है।

'जल सहेली' या महिला जल निगरानी दल

जल जीवन मिशन के दिशानिर्देशों के अनुसार, देश की प्रत्येक ग्राम पंचायत में कम से कम 5 स्थानीय महिलाओं—जिनमें आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, स्वयं सहायता समूह (SHG) की दीदियां और स्कूल शिक्षिकाएं शामिल हैं—को पेयजल विभाग द्वारा फील्ड टेस्ट किट (Field Test Kit - FTK) के उपयोग का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।

फील्ड टेस्ट किट (FTK) से की जाने वाली 8 प्रमुख जांचें

  • pH टेस्ट: लिटमस आधारित केमिकल ड्रॉप्स से अम्लीय या क्षारीय संतुलन नापना।
  • टर्बिडिटी (मैलापन): पानी के पारदर्शी होने की जांच।
  • टोटल हार्डनेस (कठोरता): साबुन के झाग बनने और खारेपन की माप।
  • क्लोराइड: पानी में लवणों की मात्रा।
  • फ्लोराइड: दांतों और हड्डियों को नुकसान पहुंचाने वाले फ्लोराइड का रंग-आधारित परीक्षण।
  • नाइट्रेट: खेतों में यूरिया उर्वरक और सीवेज के रिसाव से होने वाले घातक नाइट्रेट प्रदूषण की जांच।
  • आयरन (लौह तत्व): पानी के लाल-पीलेपन और स्वाद की जांच।
  • H2S शीशी टेस्ट (बैक्टीरिया जांच): पानी में हाइड्रोजन सल्फाइड उत्पन्न करने वाले घातक मल बैक्टीरिया (Coliform/E.coli) की 24 घंटे में पहचान करने वाली विशेष टेस्ट ट्यूब।

जैसे ही जल सहेली टेस्ट किट में केमिकल मिलाकर रंग बदलती है, वह अपने स्मार्टफोन में मौजूद WQMIS Mobile App में परिणाम दर्ज करती है। यदि रंग गुलाबी या काला हो जाता है (जो प्रदूषण का संकेत है), तो ऐप तुरंत लाल चेतावनी जनरेट कर देता है और ग्राम पंचायत प्रधान, ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (BDO) और पीएचईडी (PHED) के जूनियर इंजीनियर को तुरंत सतर्क कर दिया जाता है।

5. नागरिक अपने गांव के पानी की रिपोर्ट मोबाइल पर कैसे देखें?

सुजलाम भारत प्लेटफॉर्म की पारदर्शिता का सबसे बड़ा सबूत यह है कि देश का कोई भी नागरिक—चाहे वह दिल्ली में बैठा हो या किसी सुदूर गांव में—अपने गांव के नल के पानी की स्थिति लाइव देख सकता है। इसके लिए आपको किसी दफ्तर जाने की जरूरत नहीं है:

नागरिक डैशबोर्ड देखने की चरणबद्ध प्रक्रिया

  1. अपने मोबाइल ब्राउज़र में जल जीवन मिशन का आधिकारिक डैशबोर्ड (ejalshakti.gov.in/jjmreport) या सुजलाम भारत पोर्टल खोलें।
  2. होमपेज पर 'Citizen Corner / Water Quality Dashboard' विकल्प पर क्लिक करें।
  3. क्रमशः अपने राज्य (State), जिला (District), ब्लॉक (Block) और ग्राम पंचायत (Gram Panchayat) का चयन करें।
  4. इसके बाद अपने गांव (Village) और मोहल्ले की बसावट (Habitation) पर टैप करें।
  5. स्क्रीन पर आपके गांव की पूरी जल कुंडली खुल जाएगी, जिसमें निम्नलिखित विवरण दिखाई देंगे:
    • कुल स्वीकृत कनेक्शन और आज चालू स्थिति में मौजूद नलों की संख्या।
    • दैनिक पानी सप्लाई का समय (जैसे सुबह 6:00 से 8:00 बजे और शाम 5:00 से 7:00 बजे)।
    • औसतन प्रति व्यक्ति कितना पानी (LPCD) सप्लाई हुआ।
    • पिछली जल जांच की तारीख, जांच करने वाली लैब का नाम और जांच के 8 मानकों की स्थिति (Safe / Unsafe)।
    • ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति (VWSC) के अध्यक्ष और प्लंबर का नाम व मोबाइल नंबर।

6. गंदे पानी या पाइपलाइन लीकेज की ऑनलाइन शिकायत और त्वरित समाधान

यदि आपके नल में गंदा, बदबूदार या मटमैला पानी आ रहा है, या सड़क पर बिछाई गई पाइपलाइन टूट गई है और पीने का साफ पानी व्यर्थ बह रहा है, तो सुजलाम भारत आपको त्वरित ऑनलाइन शिकायत की सुविधा देता है:

शिकायत दर्ज करने के तीन आसान तरीके

  • तरीका 1: WQMIS सिटीजन पोर्टल पर शिकायत: neer.gov.in पर 'Report Water Issue' पर जाएं, अपने नल कनेक्शन का नंबर या गांव का नाम दर्ज करें, गंदे पानी की फोटो या लीकेज का छोटा वीडियो अपलोड करें और सबमिट करें।
  • तरीका 2: राष्ट्रीय जल हेल्पलाइन टोल-फ्री नंबर: अपने फोन से सीधे 1800-180-1551 या राज्य-स्तरीय जल हेल्पलाइन पर कॉल करके अपनी शिकायत नोट कराएं।
  • तरीका 3: ग्राम पंचायत जल शिकायत पंजिका: पंचायत भवन में ग्राम रोजगार सहायक या जल सहेली के पास रखी अधिकृत जल पंजिका में शिकायत दर्ज कराएं, जिसे वे 2 घंटे के अंदर पोर्टल पर डिजिटल रूप से अपलोड करते हैं।

समाधान की समय-सीमा (Standard Operating Procedure)

पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा तय मानकों के अनुसार:

  • पाइपलाइन लीकेज: शिकायत मिलने के 12 से 24 घंटे के अंदर लाइन की मरम्मत करना अनिवार्य है।
  • गंदा/दूषित जल: 6 घंटे के अंदर सप्लाई रोककर क्लोरीन शॉक-ट्रीटमेंट देना और वैकल्पिक टैंकर व्यवस्था करना।
  • मोटर/पंप खराबी: 48 घंटे के भीतर तकनीकी सुधार या स्पेयर पार्ट्स बदलना।

7. पेयजल गुणवत्ता मानक (BIS 10500): स्वास्थ्य प्रभाव और शुद्धिकरण

भारत में पीने के पानी की शुद्धता भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा निर्धारित IS 10500:2012 मानकों के आधार पर मापी जाती है। इन मानकों का कड़ाई से पालन न होने पर मानव स्वास्थ्य पर गंभीर दूरगामी प्रभाव पड़ते हैं।

फ्लोराइड की अधिकता से दांत पीले पड़ जाते हैं और रीढ़ की हड्डी झुक जाती है, जिसे कंकालीय फ्लोरोसिस (Skeletal Fluorosis) कहते हैं। राजस्थान, गुजरात और आंध्र प्रदेश के कई जिलों में यह बड़ी समस्या रही है। इसी प्रकार गंगा और ब्रह्मपुत्र के मैदानी इलाकों (पश्चिम बंगाल, बिहार, असम) में आर्सेनिक प्रदूषण त्वचा के घाव और फेफड़ों के कैंसर का कारण बनता रहा है। सुजलाम भारत प्लेटफार्म पर इन सभी रेड-स्पॉट्स की रियल-टाइम मैपिंग होने से सरकार समय रहते आधुनिक डी-आर्सेनिक और डी-फ्लोराइडेशन प्लांट्स लगाकर लाखों जिंदगियों को बचा रही है।

8. स्रोत स्थायित्व (Source Sustainability) और ग्रे-वाटर रीसाइक्लिंग

केवल नल लगाना समाधान नहीं है, जब तक कि जिस कुएं, नदी या ट्यूबवेल से पानी आ रहा है, वह हमेशा भरा न रहे। इसी को स्रोत स्थायित्व (Source Sustainability) कहा जाता है।

सुजलाम भारत प्लेटफार्म पर मनरेगा (MGNREGA) और 15वें वित्त आयोग (15th Finance Commission) के टाइड फंड्स (Tied Grants) को जोड़कर देखा जाता है। हर ग्राम पंचायत को अपनी कुल अनुदान राशि का 30% हिस्सा पेयजल और जल संरक्षण पर खर्च करना अनिवार्य है:

  • ग्रे-वाटर मैनेजमेंट (नालियों के पानी का शोधन): घरों से निकलने वाले नहाने और कपड़े धोने के पानी (ग्रे-वाटर) को सोक-पिट्स, लीच-पिट्स और वेस्ट स्टेबलाइजेशन पॉन्ड्स (WSP) के जरिए साफ करके भूजल में रीचार्ज किया जाता है।
  • रेनवाटर हार्वेस्टिंग (वर्षा जल संचयन): हर सरकारी स्कूल, पंचायत भवन और आंगनवाड़ी केंद्र की छत पर रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य किया गया है।
  • चेकडैम और जोहड़ पुनरुद्धार: वर्षा के पानी को रोकने के लिए पारंपरिक जल संरचनाओं को गहरा करके भूजल स्तर को ऊपर उठाने का कार्य सुजलाम भारत के डैशबोर्ड पर सैटेलाइट इमेजरी (ISRO Bhuvan Portal) से ट्रैक किया जाता है।

9. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

प्र. 1: सुजलाम भारत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपने गांव के पानी की जांच रिपोर्ट कैसे देख सकते हैं?

उत्तर: आप जल जीवन मिशन के आधिकारिक पोर्टल (ejalshakti.gov.in/jjmreport) या WQMIS पोर्टल (neer.gov.in) पर जाकर अपने राज्य, जिला, ब्लॉक और गांव का नाम चुनकर दैनिक आपूर्ति रिपोर्ट, पानी का दबाव और लैब टेस्ट का पूरा विवरण ऑनलाइन मुफ्त में देख सकते हैं।

प्र. 2: यदि नल से मटमैला या बदबूदार पानी आ रहा हो, तो तुरंत क्या कदम उठाना चाहिए?

उत्तर: सबसे पहले उस पानी को पीने के लिए बिल्कुल इस्तेमाल न करें। तुरंत अपने स्मार्टफोन से WQMIS पोर्टल पर गंदे पानी की फोटो अपलोड करके ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें या राष्ट्रीय जल हेल्पलाइन टोल-फ्री नंबर 1800-180-1551 पर कॉल करें। साथ ही अपनी ग्राम पंचायत की जल सहेली को सूचित करें ताकि वह मौके पर फील्ड टेस्ट किट से पानी की जांच कर सप्लाई रुकवा सके।

प्र. 3: क्या कोई नागरिक अपने घर के निजी बोरवेल के पानी की सरकारी लैब में जांच करा सकता है?

उत्तर: जी हाँ, जल शक्ति मंत्रालय के नए नियमों के तहत कोई भी नागरिक मामूली सरकारी शुल्क (आमतौर पर 50 से 200 रुपये प्रति टेस्ट) देकर जिले की NABL-मान्यता प्राप्त जिला जल परीक्षण प्रयोगशाला में अपने निजी बोरवेल या हैंडपंप के पानी का सैंपल जमा कर सकता है। जांच रिपोर्ट 48 घंटे के भीतर आपके मोबाइल पर SMS और WQMIS पोर्टल लिंक के रूप में भेज दी जाती है।

प्र. 4: जल जीवन मिशन के तहत प्रतिदिन प्रति व्यक्ति कितना पानी मिलना अनिवार्य है?

उत्तर: केंद्र सरकार के राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के नीतिगत मानकों के अनुसार, प्रत्येक ग्रामीण परिवार को वर्ष भर 24x7 या निर्धारित समय पर न्यूनतम 55 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन (55 LPCD - Litres Per Capita per Day) निर्धारित गुणवत्ता वाला पेयजल उपलब्ध कराना वैधानिक दायित्व है।

प्र. 5: ग्राम पंचायत में नल के पानी की देखरेख और मेंटेनेंस की जिम्मेदारी किसकी होती है?

उत्तर: गांव स्तर पर नल-जल योजना के संचालन और संधारण (Operations & Maintenance - O&M) की पूरी जिम्मेदारी ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति (VWSC) या ग्राम पंचायत की 'पानी समिति' की होती है। इसमें 50% महिला सदस्य होती हैं। गांव में नियुक्त प्रशिक्षित पंप ऑपरेटर और इलेक्ट्रीशियन/प्लंबर दैनिक आपूर्ति और छोटी-मोटी मरम्मत संभालते हैं, जिसका खर्च पंचायत के स्थानीय यूजर चार्ज और 15वें वित्त आयोग के फंड से होता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q. सुजलाम भारत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपने गांव के पानी की जांच रिपोर्ट कैसे देख सकते हैं?

A. नागरिक WQMIS पोर्टल (neer.gov.in) या जल जीवन मिशन डैशबोर्ड पर अपने राज्य, जिला और ग्राम पंचायत का नाम चुनकर रासायनिक व जैविक शुद्धता की लाइव रिपोर्ट देख सकते हैं।

Q. यदि नल से मटमैला या बदबूदार पानी आ रहा हो, तो तुरंत क्या कदम उठाना चाहिए?

A. दूषित पानी न पिएं, तुरंत WQMIS पोर्टल या राष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-180-1551 पर फोटो सहित शिकायत दर्ज करें और पंचायत की जल सहेली को सूचित करें।

Q. क्या कोई नागरिक अपने घर के निजी बोरवेल के पानी की सरकारी लैब में जांच करा सकता है?

A. हाँ, मामूली सरकारी शुल्क देकर जिले की NABL-मान्यता प्राप्त जल प्रयोगशाला में निजी बोरवेल के पानी का परीक्षण कराया जा सकता है और डिजिटल रिपोर्ट मिलती है।

Q. जल जीवन मिशन के तहत प्रतिदिन प्रति व्यक्ति कितना पानी मिलना अनिवार्य है?

A. मानकों के अनुसार ग्रामीण भारत के प्रत्येक नागरिक के लिए प्रतिदिन 55 लीटर शुद्ध पेयजल (55 LPCD) की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करना अनिवार्य है।

Q. ग्राम पंचायत में नल के पानी की देखरेख और मेंटेनेंस की जिम्मेदारी किसकी होती है?

A. यह जिम्मेदारी 50% महिलाओं की भागीदारी वाली ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति (VWSC) और प्रशिक्षित स्थानीय पंप ऑपरेटर व प्लंबर की होती है।

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