yojana ⏱️ 16 मिनट पढ़ें 📅 24 सितंबर 2026

Swachhata Hi Seva 2026: 'एक पेड़ मां के नाम' और ई-वेस्ट निपटान अभियान, जानें नागरिकों के लिए मुख्य लाभ और भागीदारी प्रक्रिया

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राजेश कुमार मीना
वरिष्ठ नीति एवं ग्रामीण विकास विश्लेषक

विगत 8 वर्षों से केंद्र व राज्य सरकारों की कल्याणकारी योजनाओं, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT), ग्रामीण विकास एवं डिजिटल भुगतान प्रणालियों पर निरंतर शोधपरक विश्लेषण।

⚡ त्वरित उत्तर (Quick Answer)

स्वच्छता ही सेवा (SHS) 2026 केंद्र सरकार का राष्ट्रव्यापी स्वच्छता पखवाड़ा अभियान है, जो 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक पूरे देश में चलाया जा रहा है। इस वर्ष इसका मुख्य फोकस 'स्वभाव स्वच्छता - संस्कार स्वच्छता' के तहत पर्यावरण संरक्षण हेतु 'एक पेड़ मां के नाम' वृक्षारोपण, पुराने इलेक्ट्रॉनिक कचरे (e-Waste) का वैज्ञानिक निस्तारण और सफाई मित्रों के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य सुरक्षा शिविर आयोजित करना है।

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📌 मुख्य विशेषताएं व आवश्यक बिंदु

  • राष्ट्रव्यापी पखवाड़ा 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सक्रिय।
  • 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत MeriLiFE पोर्टल पर लगाए गए पौधों की जियो-टैगिंग और डिजिटल सर्टिफिकेट की सुविधा।
  • सफाई मित्रों के लिए विशेष स्वास्थ्य सुरक्षा शिविर, जिसमें आयुष्मान भारत (PM-JAY), PMSBY और PMJJBY का तत्काल पंजीकरण शामिल है।
  • डाक विभाग और केंद्र सरकार के दफ्तरों में स्पेशल कैंपेन 6.0 के तहत पुराने ई-वेस्ट और फाइलों का 100% साइंटिफिक डिस्पोजल।
  • Swachhata-MoHUA ऐप के माध्यम से नागरिक अपने आस-पास के कचरा डंप की लाइव फोटो भेजकर 24 घंटे में सफाई करा सकते हैं।
चरण नागरिक के लिए करने योग्य मुख्य कार्य संबंधित आधिकारिक पोर्टल या स्थल मिलने वाला सीधा लाभ / प्रमाण पत्र
चरण 1: श्रमदान पंजीकरण अपने नजदीकी स्वच्छता कार्यक्रम की जानकारी लेकर 1 घंटे के जन-श्रमदान में भाग लें। Swachh Bharat Urban Portal स्वच्छता सारथी के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान व स्थानीय सम्मान
चरण 2: ई-कचरा जमा करना घर का पुराना व खराब इलेक्ट्रॉनिक कचरा (मोबाइल, चार्जर, केबल, बैटरी) संग्रह केंद्र में दें। नजदीकी मुख्य डाकघर (India Post) या नगर निगम ई-वेस्ट कियोस्क पर्यावरण अनुकूल ई-वेस्ट डिस्पोजल की आधिकारिक पावती रसीद
चरण 3: पौधे का फोटो अपलोड अपनी मां के नाम पर छायादार पौधा लगाएं, लोकेशन ऑन करके फोटो अपलोड करें। मेरी लाइफ पोर्टल (MeriLiFE) पर्यावरण मंत्रालय का आधिकारिक 'ग्रीन वॉरियर' डिजिटल सहभागिता प्रमाण पत्र
चरण 4: गंदगी की शिकायत दर्ज करना सार्वजनिक स्थल पर कचरे का ढेर दिखने पर मोबाइल ऐप से फोटो खींचकर शिकायत भेजें। Swachhata-MoHUA Mobile App (Google Play / App Store) नगर पालिका द्वारा 24 घंटे के अंदर सफाई और समाधान का फोटो अपडेट
चरण 5: सफाई मित्र सुरक्षा में सहयोग स्थानीय सफाई कर्मचारियों को स्वास्थ्य शिविर में ले जाने और बीमा फॉर्म भरने में मदद करें। निकटतम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र / जिला नागरिक अस्पताल सफाई कर्मियों को आयुष्मान भारत गोल्डन कार्ड और 2 लाख का जीवन बीमा लाभ

1. स्वच्छता ही सेवा 2026: पृष्ठभूमि, उद्देश्य और नई थीम

भारत में स्वच्छता केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक जन-आंदोलन का रूप ले चुकी है। वर्ष 2014 में शुरू किए गए स्वच्छ भारत मिशन (Swachh Bharat Mission) के पहले चरण में देश को खुले में शौच से मुक्त (ODF) बनाने पर काम हुआ था। इसके बाद स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के तहत कचरा मुक्त शहर (Garbage Free Cities) और गांवों में ठोस व तरल अपशिष्ट प्रबंधन (Solid and Liquid Waste Management - SLWM) को मुख्य आधार बनाया गया। इसी कड़ी में हर वर्ष 17 सितंबर से 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) तक राष्ट्रव्यापी स्वच्छता पखवाड़ा 'स्वच्छता ही सेवा' (Swachhata Hi Seva - SHS) के रूप में आयोजित किया जाता है।

वर्ष 2026 के स्वच्छता ही सेवा अभियान की थीम 'स्वभाव स्वच्छता - संस्कार स्वच्छता' रखी गई है। इस थीम का सीधा अर्थ यह है कि स्वच्छता को केवल एक दिन की औपचारिकता या सफाई अभियान तक सीमित न रखकर दैनिक जीवन के संस्कार और स्थायी आदत में बदलना है। आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) तथा जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (DDWS) द्वारा संयुक्त रूप से जारी आधिकारिक दिशा-निर्देशों के अनुसार, इस वर्ष अभियान को तीन मुख्य स्तंभों (Three Pillars) पर केंद्रित किया गया है:

  • पहला स्तंभ - स्वच्छता की भागीदारी (Public Participation): आम नागरिकों, युवाओं, स्वयं सहायता समूहों (SHGs), गैर-सरकारी संगठनों और कॉर्पोरेट सेक्टर को एक साथ जोड़कर सार्वजनिक स्थानों, जल स्रोतों, पार्कों और ऐतिहासिक धरोहरों पर श्रमदान सुनिश्चित करना।
  • दूसरा स्तंभ - संपूर्ण स्वच्छता एवं ब्लैक स्पॉट उन्मूलन (Cleanliness Target Units - CTUs): शहरों और गांवों में लंबे समय से बने कचरे के विशाल ढेरों (ब्लैक स्पॉट्स) की पहचान कर उन्हें पूरी तरह साफ करना और उन स्थानों को सुंदर पार्कों या नागरिक उपयोग के केंद्रों में बदलना।
  • तीसरा स्तंभ - सफाई मित्र सुरक्षा शिविर (Safai Mitra Suraksha Shivir): हमारे स्वच्छता कार्य के सच्चे नायकों यानी सफाई कर्मचारियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मान के लिए सिंगल-विंडो वेलफेयर कैंप आयोजित करना।

इस वर्ष अभियान में दो विशेष घटकों को जोड़ा गया है जिन्होंने इसे पर्यावरण और तकनीक दोनों से जोड़ दिया है—पहला 'एक पेड़ मां के नाम' (Plant4Mother) वृक्षारोपण और दूसरा 'स्पेशल कैंपेन 6.0' के अंतर्गत ई-वेस्ट (Electronic Waste) का वैज्ञानिक निस्तारण। आइए इन दोनों पहलों और इनके नागरिक लाभों को विस्तार से समझें।

2. 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान: भाग लेने का तरीका और जियो-टैगिंग

जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान और पर्यावरण क्षरण की चुनौतियों से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान स्वच्छता ही सेवा 2026 का अभिन्न अंग बन चुका है। यह अभियान केवल पौधा लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि मां के प्रति सम्मान और धरती मां के प्रति कर्तव्य का एक सुंदर भावनात्मक संगम है।

पौधे के चयन के वैज्ञानिक मानक

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने इस अभियान के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए हैं कि नागरिक केवल सजावटी विदेशी पौधे न लगाएं, बल्कि स्थानीय जलवायु के अनुकूल देशज (Native) पौधे लगाएं जो लंबे समय तक जीवित रहें और भरपूर ऑक्सीजन दें। इनमें प्रमुख हैं:

  • पीपल और बरगद: अधिकतम ऑक्सीजन उत्पादन, धूल कणों को सोखने और पक्षियों के प्राकृतिक आवास के लिए सर्वोत्तम।
  • नीम: प्राकृतिक जीवाणुरोधी, वायु शोधक और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने वाला पेड़।
  • जामुन, आंवला और सहजन (Moringa): पोषण सुरक्षा देने वाले फलदार पेड़, जो कम पानी में भी तेजी से बढ़ते हैं।
  • शीशम, अमलतास और कचनार: छायादार और भूजल संचयन को बढ़ावा देने वाले वृक्ष।

MeriLiFE पोर्टल पर जियो-टैगिंग और डिजिटल सर्टिफिकेट डाउनलोड करने की प्रक्रिया

सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि लगाए गए हर पौधे की डिजिटल निगरानी हो सके ताकि वह सूखने न पाए। इसके लिए मिशन लाइफ (LiFE - Lifestyle for Environment) के तहत विकसित मेरी लाइफ पोर्टल (merilife.org) पर जियो-टैगिंग की सीधी व्यवस्था की गई है:

  1. अपने स्मार्टफोन में गूगल प्ले स्टोर या एप्पल ऐप स्टोर से MeriLiFE App डाउनलोड करें या आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
  2. अपने आधार से लिंक या सामान्य मोबाइल नंबर दर्ज करें और प्राप्त 6-अंकों के OTP से लॉगिन करें।
  3. 'Plant a Tree for Mother / एक पेड़ मां के नाम' वाले विकल्प पर टैप करें।
  4. अपने रोपे गए पौधे के साथ अपनी या अपनी मां की एक साफ और अच्छी रोशनी वाली तस्वीर क्लिक करें। ध्यान रखें कि आपके फोन की लोकेशन (GPS) चालू होनी चाहिए ताकि पौधे का अक्षांश और देशांतर (Latitude/Longitude) स्वतः दर्ज हो जाए।
  5. पौधे की प्रजाति (जैसे नीम, पीपल, जामुन आदि) और लगाए गए स्थान का नाम (जैसे घर का बगीचा, स्कूल परिसर, सार्वजनिक पार्क) चुनें।
  6. 'Submit' बटन पर क्लिक करें। सबमिट होते ही सिस्टम द्वारा एक विशिष्ट बारकोड युक्त डिजिटल सहभागिता प्रमाण पत्र (E-Certificate of Appreciation) जनरेट होगा, जिसे आप तुरंत PDF फॉर्मेट में डाउनलोड कर सकते हैं और सोशल मीडिया पर साझा कर सकते हैं।

3. सफाई मित्र सुरक्षा शिविर: मुफ्त स्वास्थ्य जांच और सामाजिक सुरक्षा

सफाई कर्मचारी हमारे समाज की रीढ़ हैं, जो अत्यधिक कठिन और कभी-कभी अस्वस्थ परिस्थितियों में काम करके हमारे शहरों और गांवों को स्वच्छ रखते हैं। स्वच्छता ही सेवा 2026 के अंतर्गत देश के प्रत्येक नगर निगम, नगर पालिका, ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर पर 'सफाई मित्र सुरक्षा शिविर' अनिवार्य रूप से आयोजित किए जा रहे हैं।

शिविर में मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाएं

इन विशेष चिकित्सा शिविरों में सफाई मित्रों और उनके परिवारों को निम्नलिखित निःशुल्क स्वास्थ्य जांच उपलब्ध कराई जा रही है:

  • व्यापक रक्त जांच (Complete Blood Profile): सीबीसी (CBC), हीमोग्लोबिन, ब्लड शुगर (HbA1c), लिवर और किडनी फंक्शन टेस्ट।
  • श्वसन प्रणाली परीक्षण (Spirometry & Chest X-Ray): धूल, धुएं और कचरे के संपर्क में रहने के कारण होने वाली सांस की बीमारियों और टीबी की समय रहते पहचान।
  • त्वचा एवं नेत्र परीक्षण: त्वचा के संक्रमण, डर्मेटाइटिस और दृष्टि दोष की जांच कर मौके पर ही जरूरी दवाएं और चश्मे वितरित किए जा रहे हैं।
  • टीकाकरण अभियान: टेटनस (Tetanus) और हेपेटाइटिस-बी (Hepatitis-B) के टीके सभी पात्र सफाई कर्मचारियों को बिना किसी शुल्क के लगाए जा रहे हैं।

कल्याणकारी योजनाओं का सिंगल-विंडो ऑन-द-स्पॉट पंजीकरण

स्वास्थ्य जांच के साथ-साथ इन शिविरों में जिला प्रशासन द्वारा विभिन्न सरकारी योजनाओं के हेल्पडेस्क लगाए गए हैं, जहां मौके पर ही कागजी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं:

  • आयुष्मान भारत (PM-JAY) गोल्डन कार्ड: प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक के मुफ्त कैशलेस इलाज की गारंटी। शिविर में ही बायोमेट्रिक ई-केवाईसी करके नया कार्ड प्रिंट करके दिया जा रहा है।
  • प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY): मात्र 20 रुपये के वार्षिक प्रीमियम पर 2 लाख रुपये का दुर्घटना मृत्यु व दिव्यांगता बीमा। इसका प्रीमियम नगर पालिका या स्थानीय निकाय द्वारा वहन किया जा रहा है।
  • प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY): 436 रुपये के वार्षिक प्रीमियम पर 2 लाख रुपये का जीवन बीमा कवर।
  • नमस्ते योजना (NAMASTE Scheme): सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई में शून्य मानव प्रवेश (Zero Human Casualties) के लक्ष्य के साथ सभी सीवर कर्मियों की प्रोफाइलिंग, उन्हें सुरक्षा उपकरण (PPE Kits) और मशीनीकृत सफाई उपकरणों के लिए सब्सिडी व आसान ऋण उपलब्ध कराना।

4. स्पेशल कैंपेन 6.0: पुराने ई-कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण कैसे हो रहा है?

डिजिटल इंडिया के विस्तार के साथ-साथ देश में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग कई गुना बढ़ गया है। लेकिन जब ये उपकरण खराब या पुराने हो जाते हैं, तो ये सामान्य कचरे से कहीं अधिक खतरनाक ई-कचरा (Electronic Waste) बन जाते हैं। पुराने कंप्यूटर, टूटे हुए मोबाइल, मॉनिटर, लिथियम बैटरियों और प्रिंटर कार्ट्रिज में सीसा (Lead), पारा (Mercury), कैडमियम और आर्सेनिक जैसे जहरीले रसायन होते हैं। यदि इन्हें खुले में फेंक दिया जाए या अनाधिकृत कबाड़ी द्वारा जलाया जाए, तो ये भूजल और हवा को गंभीर रूप से प्रदूषित करते हैं।

इसी खतरे को समाप्त करने के लिए केंद्र सरकार के प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG) द्वारा शुरू किया गया 'स्पेशल कैंपेन 6.0' (Special Campaign 6.0) सरकारी दफ्तरों, स्वायत्त संस्थानों और डाकघरों में बड़े पैमाने पर ई-कचरा निस्तारण का रोल मॉडल बन चुका है:

ई-वेस्ट निस्तारण की वैज्ञानिक प्रक्रिया (SOP)

  1. इन्वेंट्री और ऑडिट: सरकारी कार्यालयों और डाकघरों में ऐसे सभी हार्डवेयर को सूचीबद्ध किया जाता है जो 'End-of-Life' यानी अनुपयोगी हो चुके हैं।
  2. डेटा सैनिटाइजेशन (Data Sanitization): डिस्पोजल से पहले कंप्यूटर हार्ड डिस्क और स्टोरेज डिवाइसों से संवेदनशील सरकारी या नागरिक डेटा को मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड आईटी (MeitY) के मानकों के अनुसार स्थायी रूप से वाइप (Degaussing/Shredding) किया जाता है ताकि डेटा लीक का कोई खतरा न रहे।
  3. CPCB अधिकृत रीसाइक्लर्स को आवंटन: पूरा ई-कचरा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (SPCB) द्वारा प्रमाणित रीसाइक्लर्स को ही ई-नीलामी (MSTC Portal) के जरिए सौंपा जाता है।
  4. मटेरियल रिकवरी: अधिकृत संयंत्रों में इन इलेक्ट्रॉनिक बोर्डों से सोना, चांदी, तांबा और दुर्लभ धातुएं (Rare Earth Elements) पर्यावरण अनुकूल तकनीकों से निकाली जाती हैं।
  5. स्थान का सदुपयोग: कबाड़ और पुरानी फाइलों के निस्तारण से खाली हुई लाखों वर्ग फुट सरकारी जगह को आधुनिक नागरिक सुविधा केंद्रों (Citizen Service Lounges), क्रेच और डिजिटल लाइब्रेरी में रूपांतरित किया जा रहा है।

5. आम नागरिक के लिए स्टेप-बाय-स्टेप एक्शन गाइड और पोर्टल प्रक्रिया

एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर आप 'स्वच्छता ही सेवा 2026' में किस तरह सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं? यहां आपके लिए एक सरल, व्यावहारिक और चरणबद्ध गाइड दी गई है:

कदम 1: अपने घर का ई-कचरा सुरक्षित तरीके से जमा करें

अपने घर में दराजों में पड़े पुराने खराब चार्जर, पुरानी यूएसबी केबल, टूटे हुए फीचर फोन, रिमोट और खिलौनों की बैटरियां इकट्ठा करें। इन्हें कभी भी गीले या सूखे कचरे के सामान्य डस्टबिन में न डालें। अपने शहर के मुख्य डाकघर (Head Post Office) या नगर पालिका के 'e-Waste Collection Kiosk' में जाएं और वहां बने विशेष नीले रंग के ई-वेस्ट बिन में इसे जमा करें। डाक विभाग द्वारा इसके लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता है।

कदम 2: स्वच्छ भारत अर्बन पोर्टल पर श्रमदान में जुड़ें

यदि आप अपने पड़ोस, सोसाइटी या गांव में सामूहिक सफाई अभियान चलाना चाहते हैं, तो sbmurban.org पर जाएं। वहां 'स्वच्छता ही सेवा इवेंट्स' सेक्शन में अपने शहर का पिनकोड डालें। आपको पता चलेगा कि आपके निकट किस पार्क, झील या सार्वजनिक स्थल पर श्रमदान हो रहा है। आप ऑनलाइन पंजीकरण करके सीधे वहां पहुंच सकते हैं।

कदम 3: Swachhata-MoHUA App का उपयोग करके गंदगी की शिकायत करें

यदि आपको अपने घर के आस-पास, सड़क पर या किसी खाली प्लॉट में कचरे का भारी ढेर दिखता है, तो किसी से शिकायत करने की बजाय अपने स्मार्टफोन का इस्तेमाल करें:

  • Swachhata App खोलें और 'Post a Complaint' पर टैप करें।
  • कचरे के ढेर की एक लाइव फोटो लें। ऐप अपने आप GPS से सही लोकेशन उठा लेगा।
  • कचरे की श्रेणी चुनें (जैसे- अनकलेक्टेड गार्बेज, डेड एनिमल, ओपन डंपिंग, या ओवरफ्लोइंग डस्टबिन)।
  • शिकायत दर्ज होते ही आपको एक टिकट नंबर मिलेगा। नगर निगम की सैनिटेशन टीम को 24 घंटे के अंदर उस कचरे को हटाकर उसी स्थान की साफ-सुथरी फोटो ऐप पर अपलोड करनी होती है, जिसे आप स्वयं संतुष्ट होने पर ही 'Close' करते हैं।

6. पर्यावरण, नागरिक और सफाई कर्मी: लाभ का संपूर्ण तुलनात्मक विश्लेषण

स्वच्छता ही सेवा 2026 केवल एक नारा नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग के लिए प्रत्यक्ष, मापने योग्य लाभ लेकर आया है। नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट किया गया है कि यह अभियान नागरिकों, पर्यावरण और सफाई कर्मियों के जीवन में क्या बदलाव ला रहा है:

प्रमुख आयाम सामान्य स्थिति (पहले) स्वच्छता ही सेवा 2026 के अंतर्गत नया बदलाव दीर्घकालिक प्रभाव एवं लाभ
वृक्षारोपण एवं संरक्षण केवल पौधे लगा दिए जाते थे, उनकी उत्तरजीविता (Survival Rate) की कोई ट्रैकिंग नहीं होती थी। 'एक पेड़ मां के नाम' के तहत MeriLiFE पोर्टल पर 100% जियो-टैगिंग और डिजिटल मॉनिटरिंग। हरित आवरण में 15% तक की वृद्धि और भूजल स्तर में सुधार।
इलेक्ट्रॉनिक कचरा निपटान लोग घरों में पुराना ई-कचरा दबाकर रखते थे या कबाड़ी को बेच देते थे जो उसे जला देता था। डाकघरों और नगर निगमों में प्रमाणित ई-वेस्ट कियोस्क और CPCB रीसाइक्लिंग चेन। भारी धातुओं से होने वाले कैंसर व श्वसन रोगों के जोखिम में भारी कमी।
सफाई मित्रों की स्वास्थ्य सुरक्षा नियमित जांच का अभाव, बीमारी होने पर जेब से खर्च, गंभीर बीमारियों की देर से पहचान। मुफ्त स्वास्थ्य जांच शिविर, आयुष्मान कार्ड (5 लाख कवर) और 2 लाख का दुर्घटना बीमा मौके पर। सफाई कर्मियों की औसत आयु में सुधार और परिवारों को वित्तीय सुरक्षा का संबल।
सार्वजनिक शिकायत निवारण वार्ड कार्यालय में चक्कर काटना, फाइलों में शिकायत का दब जाना, कोई समय सीमा नहीं। Swachhata App पर 24 घंटे का सख्त SLA (Service Level Agreement) और लाइव फोटो वेरिफिकेशन। नागरिकों में स्थानीय प्रशासन के प्रति विश्वास और शहरों की स्वच्छता रैंकिंग में सुधार।
सरकारी कार्यालय स्पेस दशकों पुरानी बेकार फाइलों और टूटे फर्नीचर से भरे गलियारे और सीढ़ियां। स्पेशल कैंपेन 6.0 के तहत लाखों टन स्क्रैप की नीलामी और स्पेस का नागरिक सुविधाओं में रूपांतरण। दफ्तरों में कार्यकुशलता में सुधार और सरकार को कबाड़ नीलामी से सैकड़ों करोड़ का राजस्व।

7. क्या करें और क्या न करें: कचरा प्रबंधन के व्यावहारिक नियम

घर और कार्यस्थल पर स्वच्छता बनाए रखने के लिए बुनियादी नियमों का पालन करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। इन आसान नियमों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं:

अवश्य करें (Do's)

  • कचरे का पृथक्करण (Source Segregation): अपने घर में कम से कम दो डस्टबिन रखें—गीले जैविक कचरे (सब्जी के छिलके, बचा खाना) के लिए हरा डस्टबिन और सूखे कचरे (कागज, प्लास्टिक, गत्ता) के लिए नीला डस्टबिन।
  • ई-कचरे को अलग रखें: उपयोग में न आने वाली बैटरियों, टूटे ईयरफोन और चार्जिंग तारों को सूखे कचरे में भी न मिलाएं; इन्हें एक अलग बॉक्स में रखकर सीधे ई-वेस्ट कलेक्शन सेंटर में दें।
  • पौधे की नियमित देखभाल: अपनी मां के नाम पर लगाए गए पौधे को पहले एक वर्ष तक सप्ताह में कम से कम दो बार पानी अवश्य दें और उसके चारों ओर बांस या लोहे का ट्री-गार्ड लगाएं।
  • पुनर्चक्रण (Recycling) को बढ़ावा: बाजार जाते समय हमेशा कपड़े या जूट का थैला साथ रखें ताकि एकल-उपयोग प्लास्टिक की आवश्यकता ही न पड़े।

कदापि न करें (Don'ts)

  • कचरा कभी न जलाएं: पत्तों, प्लास्टिक या रबर को खुले में जलाने से अत्यधिक जहरीली डाइऑक्सिन गैसें निकलती हैं जो फेफड़ों को स्थायी नुकसान पहुंचाती हैं। सूखे पत्तों की खाद (कंपोस्ट) बनाएं।
  • नालियों में कचरा न बहाएं: प्लास्टिक की थैलियों और सैनिटरी वेस्ट को नालियों में फेंकने से सीवरेज लाइन चोक हो जाती है, जिससे सफाई कर्मचारियों को जोखिम भरी परिस्थितियों में काम करना पड़ता है।
  • सार्वजनिक स्थानों पर थूकना या पेशाब करना: यह न केवल कानूनन दंडनीय अपराध है बल्कि संक्रामक बीमारियों को फैलाने का सबसे बड़ा माध्यम है।
  • अनधिकृत कबाड़ियों को लिथियम बैटरी न दें: अनाड़ी तरीके से तोड़े जाने पर मोबाइल बैटरियों में विस्फोट और आग लगने का गंभीर खतरा रहता है।

8. शिकायत निवारण, हेल्पलाइन नंबर और संपर्क सूत्र

यदि आपको स्वच्छता ही सेवा अभियान, ई-वेस्ट जमा करने, पौधे की जियो-टैगिंग या सफाई मित्र शिविर से संबंधित कोई समस्या आती है, तो आप निम्नलिखित आधिकारिक सरकारी माध्यमों पर संपर्क कर सकते हैं:

  • राष्ट्रीय स्वच्छ भारत टोल-फ्री हेल्पलाइन: 1969 (शहरी क्षेत्रों के लिए 24x7 उपलब्ध)
  • पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (ग्रामीण): 1800-011-0008 (टोल-फ्री परामर्श)
  • केंद्रीय लोक शिकायत निवारण प्रणाली (CPGRAMS): pgportal.gov.in (सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय व संबंधित मंत्रालय को ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने हेतु)
  • आधिकारिक पोर्टल: स्वच्छ भारत मिशन शहरी (sbmurban.org), मिशन लाइफ (merilife.org)
  • ई-मेल सहायता: swachhbharat-mohua@gov.in (शहरी मामलों के लिए) एवं support.merilife-moefcc@gov.in (पोर्टल तकनीकी सहायता)

9. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

प्र. 1: क्या 'स्वच्छता ही सेवा' अभियान में भाग लेने पर कोई सरकारी प्रमाण पत्र मिलता है?

उत्तर: हाँ, बिल्कुल। जब आप 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत पौधा लगाकर उसकी तस्वीर MeriLiFE पोर्टल (merilife.org) पर अपलोड करते हैं, या Swachh Bharat Urban पोर्टल पर श्रमदान गतिविधि में पंजीकरण करते हैं, तो पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित ई-प्रमाणपत्र (E-Certificate of Participation) तुरंत जनरेट होता है, जिसे आप मुफ्त में डाउनलोड कर सकते हैं।

प्र. 2: घर का पुराना इलेक्ट्रॉनिक कचरा कहां और किस समय जमा करवा सकते हैं?

उत्तर: केंद्र सरकार के डाक विभाग (India Post) ने स्पेशल कैंपेन 6.0 के अंतर्गत देश भर के सभी मुख्य डाकघरों (Head Post Offices) में विशेष 'e-Waste Collection Bins' स्थापित किए हैं। आप डाकघर के सामान्य कार्य समय (सुबह 9:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक) में जाकर अपने पुराने मोबाइल, केबल, चार्जर और बैटरियां पूरी तरह मुफ्त में जमा करवा सकते हैं। इसके अलावा कई नगर निगमों ने भी अपने जोनल कार्यालयों में ई-वेस्ट संग्रहण केंद्र खोले हैं।

प्र. 3: सफाई मित्र सुरक्षा शिविर का लाभ किन कर्मियों को मिलेगा और इसके लिए क्या दस्तावेज चाहिए?

उत्तर: इस शिविर का लाभ नगर पालिकाओं, नगर निगमों, छावनी बोर्डों, ग्राम पंचायतों और ठेके पर काम करने वाले (आउटसोर्स) सभी नियमित व संविदा सफाई कर्मचारियों, कचरा बीनने वालों और सीवर कर्मियों को मिलता है। शिविर में लाभ लेने के लिए सफाई कर्मचारी को केवल अपना आधार कार्ड, बैंक पासबुक की फोटोकॉपी और 2 पासपोर्ट साइज फोटो साथ ले जाना होता है।

प्र. 4: Swachhata-MoHUA ऐप पर दर्ज गंदगी की शिकायत कितने समय में हल होती है?

उत्तर: केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों के तहत स्वच्छता ऐप पर दर्ज कचरे और गंदगी की शिकायतों के लिए अधिकतम 24 घंटे का सख्त सर्विस लेवल एग्रीमेंट (SLA) तय किया गया है। नगर निगम की सैनिटेशन टीम कचरा साफ करके साफ किए गए स्थान की तस्वीर ऐप पर अपलोड करती है। यदि शिकायतकर्ता नागरिक समाधान से संतुष्ट नहीं होता है, तो वह उसी टिकट को उच्च अधिकारियों (Zonal Commissioner) के पास री-ओपन (Re-open) कर सकता है।

प्र. 5: क्या ग्रामीण क्षेत्रों की ग्राम पंचायतें भी इस अभियान से जुड़ी हैं?

उत्तर: जी हाँ, जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अधीन देश की सभी 2.5 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों में स्वच्छता ही सेवा पखवाड़ा अनिवार्य रूप से संचालित हो रहा है। ग्राम पंचायतों में सामुदायिक खाद गड्ढों (Community Compost Pits) का निर्माण, सोक-पिट निर्माण, प्लास्टिक कचरा प्रबंधन और सार्वजनिक तालाबों व कुओं की सफाई का श्रमदान व्यापक रूप से किया जा रहा है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q. क्या 'स्वच्छता ही सेवा' अभियान में भाग लेने पर कोई सरकारी प्रमाण पत्र मिलता है?

A. हाँ, MyGov पोर्टल और MeriLiFE ऐप पर स्वच्छता श्रमदान या 'एक पेड़ मां के नाम' का फोटो अपलोड करने पर तुरंत डिजिटल सहभागिता प्रमाण पत्र डाउनलोड किया जा सकता है।

Q. घर का पुराना इलेक्ट्रॉनिक कचरा कहां जमा करवा सकते हैं?

A. डाक विभाग के विशेष अभियान के तहत कई प्रधान डाकघरों और नगर पालिका कार्यालयों में 'e-Waste Collection Kiosk' बनाए गए हैं, जहां नागरिक मुफ्त में पुराना कचरा जमा कर सकते हैं।

Q. सफाई मित्र सुरक्षा शिविर का लाभ किन कर्मियों को मिलेगा?

A. नगर पालिका, ग्राम पंचायत और संविदा (आउटसोर्स) पर कार्यरत सभी सफाई कर्मचारी अपने आधार कार्ड के जरिए नजदीकी शिविर में मुफ्त स्वास्थ्य जांच और बीमा का लाभ ले सकते हैं।

Q. Swachhata-MoHUA ऐप पर दर्ज गंदगी की शिकायत कितने समय में हल होती है?

A. केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों के तहत स्वच्छता ऐप पर दर्ज शिकायतों के लिए अधिकतम 24 घंटे का समय निर्धारित है और समाधान की लाइव फोटो नागरिक को भेजी जाती है।

Q. क्या ग्रामीण क्षेत्रों की ग्राम पंचायतें भी इस अभियान से जुड़ी हैं?

A. जी हाँ, देश की सभी 2.5 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों में सामुदायिक खाद गड्ढों, प्लास्टिक पृथक्करण और जल स्रोतों की सफाई का अभियान सघनता से चलाया जा रहा है।

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